नेवले का बलिदान - पंचतंत्र की कहानी
Fantasy

नेवले का बलिदान - पंचतंत्र की कहानी

निष्ठावान नेवले का बलिदान

14 PLAYS
by Nishant
पंचतंत्र की कहानियाँ

Episode 2 of 25

पंचतंत्र की कहानियाँ

Up next · Episode 3 of 25

बंदर और मगरमच्छ

  1. बातूनी कछुआ - एक जानलेवा चुप्पी

    Ep 14:0764 plays

  2. नेवले का बलिदान - पंचतंत्र की कहानी

    Ep 25:5814 plays

  3. बंदर और मगरमच्छ

    Ep 31:2713 plays3 ✦

  4. नीला सियार

    Ep 42:085 plays3 ✦

  5. चालाक बगुला और समझदार केकड़ा

    Ep 54:0060 plays3 ✦

  6. पंचतंत्र की मित्रता: चूहों और हाथियों की कथा

    Ep 63:315 plays3 ✦

  7. चालाक खरगोश और शेर का अक्स

    Ep 74:057 plays3 ✦

  8. कौए और सियार की चालाकी: पंचतंत्र की कहानी

    Ep 83:215 plays3 ✦

  9. सांप, नेवला और अधीर माँ: पंचतंत्र की सीख

    Ep 93:393 plays3 ✦

  10. शेर और चूहे की दोस्ती: ईसप की सीख

    Ep 103:171 play3 ✦

  11. लोमड़ी और खट्टी अंगूर की कहानी (ईसप की कथा)

    Ep 113:353 ✦

  12. सच्ची मित्रता और भालू की सीख

    Ep 123:0016 plays3 ✦

  13. चालाक कौआ और घड़े की सीख

    Ep 133:423 ✦

  14. चालाक गीदड़ और भूखा बाघ: लोककथा की सीख

    Ep 143:233 ✦

  15. चालाक सियार और भोला हिरन: पंचतंत्र की सीख

    Ep 153:543 ✦

  16. ब्राह्मण, बकरी और तीन चालाक चोरों की कहानी

    Ep 163:203 plays3 ✦

  17. बंदर की नकलची आदत और दुखद सजा

    Ep 173:543 ✦

  18. शेर, ऊँट और चालाक सियार की कहानी

    Ep 183:413 ✦

  19. शेर की खाल में गधा: पंचतंत्र की सीख

    Ep 192:553 ✦

  20. धर्म की परीक्षा: राजकुमार की अनोखी परीक्षा

    Ep 203:453 plays3 ✦

  21. बलिदानी बंदर राजाः एक प्रेरणादायक जातक कथा

    Ep 213:543 ✦

  22. खरगोश का त्याग: एक प्रेरणादायक कहानी

    Ep 223:573 ✦

  23. ईर्ष्या की आग: रानी, हाथी और पूर्व जन्म की कथा

    Ep 234:093 ✦

  24. सुनहरे हिरण राजा की करुणा और बलिदान

    Ep 244:053 ✦

  25. हँसी का इलाज: राजा और वैद्य की कहानी

    Ep 254:153 ✦

About This Story

Story Transcript

प्राचीन काल की बात है जब नदियां पवित्र थी और मनुष्य प्रकृति के साथ तालमेल में रहता था। एक हरे भरे शांत गांव के किनारे देवदासी और वेद व्यास नामक एक गरीब, लेकिन संतुष्ट ब्राह्मण युगल रहते थे। उनके घर में खुशहाली तब आई जब उनके यहां एक नन्हे बालक का जन्म हुआ, वह बालक उनके लिए भगवान का प्रसाद था। लेकिन इस समय एक और चीज भी उनके जीवन में आया। वेदव्यास एक बार जंगल से गुजर रहे थे। जब उन्हें एक नेवले का बच्चा मिला। उसकी मां शिकारी का शिकार हो चुकी थी। वेदव्यास का दिल भर आया। वह उसे असहाय बच्चों को अपने घर ले आए। देवदासी ने उसे शहर सपना आया। वे उसे अपने पुत्र की तरह ही स्नेह देते थे। दोनों साथ खेलते और साथ ही बड़े हुए बालक और नेवले के बीच एक अटूट विश्वास एक अनोखा बंधन बन गया था। नेवला केवल एक जानवर नहीं था वो उनका रक्षक उनका निष्ठावान साथी और उनके बच्चे का बड़ा भाई बन गया था। उसके रहने से घर सुरक्षित महसूस होता था। लेकिन एक दिन वह दिन आया जिसने इस परिवार की नियति बदल दी। वेदव्यास को सुबह ही किसी कार्य से शहर जाना पड़ा। घर में देवदासी और उसका नन्हा बालक थे। दोपहर हुई तो देवदासी को लगा कि उसे पवित्र नदी से पानी लाने जाना चाहिए। बालक पालने में गहरी नींद सो रहा था। देवदासी नेवले की ओर देखा जो पालने के पास ही बैठा था। उसने नेवले से कहा, मेरे प्यारे साथी मैं नदी पर पानी लेने जा रही हूं। वेदव्यास बाहर है। मेरे आने तक इस नन्हे बालक का ध्यान रखना इस अकेला मत छोड़ना। नेवले ने अपनी चमकती आंखों से उसे देखा जैसे वो सब समझ गया हो। देवदासी को लगा कि उसने नेवले के रूप में एक महान रक्षक को बच्चों के पास छोड़ा है। वह कलश लेकर निकल पड़ी। जैसे ही देवदासी का साया ओझल हुआ घर एकदम शांत हो गया। नेवला बालक के पास ही बैठा रहा, परंतु उसे सन्नाटे को एक रिंग्टी हुई। मौत ने तोड़ दिया। एक विषैला काला नाग चुपचाप घर की दहलीज पार कर गया। नाग धीरे-धीरे पालने की और रिंग उसकी जहरीले जीप बाहर निकल रही थी। नेवला तुरंत सतर्क हो गया। उसकी आंखों में आज दादा कोठी जैसे ही नेन पालने पर हमला करना चाह नेवला उसे पर बिजली की गति से छपरा दोनों के बीच एक खामोश लेकिन भयानक युद्ध छिड़ गया। नीमला नाक की गर्दन पर हमला कर रहा था। नाक उसे डसने की कोशिश कर रहा था। नेवला जानता था कि अगर वो एक क्षण के लिए भी चुका तो उसका छोटा भाई मर जाएगा। वह लड़ा वह अपने कबीले की सबसे बड़ी लड़ाई लड़ा नेवले की फुर्ती ने नाग केवरों को भी फल कर दिया। अंततः नेवले ने नाक की गर्दन को अपने तेज दातों में पकड़ लिया। चटक एक ही झटके में उसने नाक के प्राण हर लिए। नाग मर चुका था। नेवला घायल था, लेकिन विजय उसका मुख और शरीर नाक के काले खून से पूरी तरह से लाल हो गया था। बालक अभी भी सो रहा था। पूरी तरह से सुरक्षित नीला गर्व से दहलीज पर बैठ गया। उसे लगा कि उसने अपने परिवार की सबसे बड़ी परीक्षा पास कर ली है। उधर देवदासी कलश में पानी भरकर लौट रही थी। उसके मन में एक अजीब सी बेचैनी थी। उसे लग रहा था कि वह अपने बच्चों को अकेले छोड़ आई है। जैसे ही उसने अपने घर की दहलीज देखी, उसकी रूह कांप उठी। दहलीज पर नेवला बैठा था। उसका सारा मुख उसकी आंखों के आसपास का हिस्सा उसके तेज दांत सब खून से सने हुए थे। खून चारो और खून है। भगवान ये क्या हो गया। देवदासी का विवेक तुरंत लुप्त हो गया। उसने एक पल भी नहीं सोचा। उसने सोचा कि नेवले ने उसे धोखा दिया है। उसने सोचा कि जिस नेवले को उसने बाल पोस्ट कर बड़ा किया उसने उसके नन्हे बालक को मार डाला है। ग्रंथ और दहशत ने उसे अंधा कर दिया। उसने पास ही पड़ा हुआ एक भारी लोहे का मुंह से उठा लिया। पापी विश्वास खाती है। तूने मेरे बच्चे को मार डाला चटक। उसने अपनी पूरी ताकत से वो भारी मुसल नेवले के सिर पर दे मारा। नेवले को यह समझने का मौका भी नहीं मिला कि क्या हुआ उसने अपनी मां की ओर एक आखरी बार देखा और वहीं प्राण त्याग दिए। सन्नाटा एक भयानक दम घुटने वाला सन्नाटा। नेवले को करने के बाद देवदासी भागती हुई घर के अंदर गई। उसका शरीर कांप रहा था। आंखें आंसुओं से भरी थी। वह पालने की ओर बधाई वह देखने के लिए तैयार थी कि उसका बच्चा मर चुका है लेकिन पालने में बालक सुख से सो रहा था। वह बालक जिंदा था। वो बिल्कुल सुरक्षित था। फिर उसकी नजर पालने के नीचे गई। वहां नाग के काले शरीर के टुकड़े टुकड़े पड़े हुए थे। देवदासी को तुरंत सारा सच समझ में आ गया। नेवला नाक से लड़ा था। नेवले ने उसके बच्चे को बचाने के लिए अपनी जान दांव पर लगा दी थी। उसने नेवलेटी मुख पर जो खून देखा था वो उसके अपने बच्चों का नहीं बल्कि नाक का था। वो भागती हुई वापस दहलीज पर आई। वहां नेवला निर्जीव पड़ा था। उसके प्यारे साथी ने अपने बलिदान का जो फल पाया वो केवल एक भयानक अंत था। मेरे प्यारे साथी मुझे माफ कर दे। मुझे माफ कर दे देवदासी उसके शव पर गिर पड़ी। वो रोती रही चिल्लाती रही, लेकिन नेवला कभी वापस नहीं आया। वेदव्यास ने लौटकर जब यह दृश्य देखा तो उनका हृदय भी फट गया। उन्होंने अपनी पत्नी को उठाया और कहा, विवेक के बिना मनुष्य केवल विनाश करता है। बिना सोचे समझे किया गया कार्य हमेशा ऐसा ही पश्चाताप लाता है। नेवले की निष्ठा की कहानी पंचतंत्र में हमेशा के लिए अमर हो गई। परंतु वह परिवार कभी भी उसे विनाशकारी जल्दबाजी को भूल नहीं पाया।