ब्राह्मण, बकरी और तीन चालाक चोरों की कहानी
Folklore

ब्राह्मण, बकरी और तीन चालाक चोरों की कहानी

पंचतंत्र की इस मनोरंजक कहानी में जानिए कैसे तीन चालाक चोरों ने एक ब्राह्मण को उसकी बकरी से अलग कर दिया और अंत में क्या सिख मिलती है।

3 PLAYS
by Storiyaa Editorial
पंचतंत्र की कहानियाँ

Episode 16 of 25

पंचतंत्र की कहानियाँ

Up next · Episode 17 of 25

बंदर की नकलची आदत और दुखद सजा

  1. बातूनी कछुआ - एक जानलेवा चुप्पी

    Ep 14:0764 plays

  2. नेवले का बलिदान - पंचतंत्र की कहानी

    Ep 25:5814 plays

  3. बंदर और मगरमच्छ

    Ep 31:2713 plays3 ✦

  4. नीला सियार

    Ep 42:085 plays3 ✦

  5. चालाक बगुला और समझदार केकड़ा

    Ep 54:0060 plays3 ✦

  6. पंचतंत्र की मित्रता: चूहों और हाथियों की कथा

    Ep 63:315 plays3 ✦

  7. चालाक खरगोश और शेर का अक्स

    Ep 74:057 plays3 ✦

  8. कौए और सियार की चालाकी: पंचतंत्र की कहानी

    Ep 83:215 plays3 ✦

  9. सांप, नेवला और अधीर माँ: पंचतंत्र की सीख

    Ep 93:393 plays3 ✦

  10. शेर और चूहे की दोस्ती: ईसप की सीख

    Ep 103:171 play3 ✦

  11. लोमड़ी और खट्टी अंगूर की कहानी (ईसप की कथा)

    Ep 113:353 ✦

  12. सच्ची मित्रता और भालू की सीख

    Ep 123:0016 plays3 ✦

  13. चालाक कौआ और घड़े की सीख

    Ep 133:423 ✦

  14. चालाक गीदड़ और भूखा बाघ: लोककथा की सीख

    Ep 143:233 ✦

  15. चालाक सियार और भोला हिरन: पंचतंत्र की सीख

    Ep 153:543 ✦

  16. ब्राह्मण, बकरी और तीन चालाक चोरों की कहानी

    Ep 163:203 plays3 ✦

  17. बंदर की नकलची आदत और दुखद सजा

    Ep 173:543 ✦

  18. शेर, ऊँट और चालाक सियार की कहानी

    Ep 183:413 ✦

  19. शेर की खाल में गधा: पंचतंत्र की सीख

    Ep 192:553 ✦

  20. धर्म की परीक्षा: राजकुमार की अनोखी परीक्षा

    Ep 203:453 plays3 ✦

  21. बलिदानी बंदर राजाः एक प्रेरणादायक जातक कथा

    Ep 213:543 ✦

  22. खरगोश का त्याग: एक प्रेरणादायक कहानी

    Ep 223:573 ✦

  23. ईर्ष्या की आग: रानी, हाथी और पूर्व जन्म की कथा

    Ep 234:093 ✦

  24. सुनहरे हिरण राजा की करुणा और बलिदान

    Ep 244:053 ✦

  25. हँसी का इलाज: राजा और वैद्य की कहानी

    Ep 254:153 ✦

About This Story

Story Transcript

बहुत समय पहले की बात है। एक गांव में हरिदत्त नाम का एक ब्राह्मण रहता था। हरिदत्त बहुत ही ईमानदार और सीधा-सादा इंसान था। एक दिन गांव के लोगों ने उसके अच्छे कामों से खुश होकर उसे एक सुंदर सी बकरी उपहार में दी। हरिदत्त बहुत खुश हुआ और बकरी को अपने कंधे पर रखकर घर की ओर चल पड़ा। रास्ता लंबा था और जंगल से होकर गुजरता था। उसी जंगल में तीन चालाक चोर रहते थे। उन्होंने हरिदत्त को बकरी लेकर जाते देखा और बकरी को पाने की योजना बनाई। वे जानते थे कि सीधा-सादा ब्राह्मण आसानी से उनकी चाल में आ सकता है। तीनों ने मिलकर योजना बनाई कि वे बारी-बारी से ब्राह्मण को भ्रमित करेंगे और उसे ये यकीन दिलाएंगे कि वह बकरी नहीं, बल्कि कोई और जानवर ले जा रहा है। जैसे ही ब्राह्मण जंगल के बीच पहुंचा, पहला चोर उसके पास आया। उसने ब्राह्मण को घूरकर देखा और हैरानी से बोला, "महोदय, आप इतने विद्वान होकर अपने कंधे पर कुत्ता क्यों ले जा रहे हैं? यह तो बड़ा अजीब है!" हरिदत्त चौंक गया, बोला, "यह कुत्ता नहीं, बकरी है। क्या तुम्हें ठीक से दिखाई नहीं देता?" पहला चोर सिर झुकाकर बोला, "माफ कीजिए, मैंने गलत देखा होगा," और वह वहां से चला गया। ब्राह्मण थोड़ा संदेह में तो आया, पर आगे बढ़ गया। कुछ दूर आगे बढ़ने पर दूसरा चोर मिला। उसने ब्राह्मण की ओर देखा और बोला, "हे ब्राह्मण, आप अपने कंधे पर गधा क्यों उठाए हुए हैं? आपके जैसे ज्ञानी पुरुष के लिए यह शोभा नहीं देता।" अब ब्राह्मण हैरान रह गया। उसे गुस्सा आया और बोला, "यह गधा नहीं, बकरी है! तुम लोग अजीब-अजीब बातें क्यों कर रहे हो?" दूसरा चोर हंसते हुए बोला, "अगर आप मानते हैं तो ठीक है।" और वह चला गया। हरिदत्त अब परेशान हो गया। उसने दो लोगों को अलग-अलग जानवर बताते सुना था। उसके मन में शंका घर करने लगी। ब्राह्मण जब और थोड़ा आगे बढ़ा तो तीसरा चोर उसके सामने आकर बोला, "महोदय, आप अपने कंधे पर मरा हुआ बछड़ा क्यों ढो रहे हैं? यह तो अपवित्र है!" हरिदत्त अब घबरा गया था। वह कांपती आवाज़ में बोला, "यह मरा हुआ बछड़ा नहीं, यह तो बकरी है, जो मुझे लोगों ने दी है।" तीसरा चोर बोला, "अगर आप ऐसा कहते हैं तो ठीक है, लेकिन मुझे तो यह मरा बछड़ा ही लगा।" अब ब्राह्मण पूरी तरह भ्रमित हो गया। उसने सोचा, तीन-तीन अलग-अलग लोग अलग-अलग जानवर बता रहे हैं, तो जरूर इसमें कुछ गड़बड़ है। शायद यह बकरी असल में कोई भूत है या मेरी आंखों का धोखा है। डर और भ्रमित होकर उसने बकरी को झाड़ियों में छोड़ दिया और भाग गया। तीनों चोर छिपे हुए थे। जैसे ही ब्राह्मण वहां से भागा, वे झाड़ियों से बाहर आए और बकरी लेकर हंसी-खुशी अपने घर चले गए। घर पहुंचकर ब्राह्मण ने अपने परिवार को पूरी बात बताई। उसकी पत्नी बोली, "अगर तुमने अपनी आंखों और समझ पर विश्वास किया होता, तो आज बकरी हमारे पास होती।" इस कहानी से हमें यह सिख मिलती है कि दूसरों की बातों में आकर अपने अनुभव और ज्ञान को कभी न भूलें। जो अपनी समझ का इस्तेमाल नहीं करता, वह अक्सर धोखा खा जाता है।