लोमड़ी और खट्टी अंगूर की कहानी (ईसप की कथा)
Folklore

लोमड़ी और खट्टी अंगूर की कहानी (ईसप की कथा)

चालाक लोमड़ी के अंगूर तक न पहुँचने पर उसने उन्हें खट्टा क्यों कहा? सुनिए यह ईसप की कहानी और जानिए “खट्टे अंगूर” की कहावत का असली अर्थ, बच्चों के लिए ए...

by Storiyaa Editorial
पंचतंत्र की कहानियाँ

Episode 11 of 25

पंचतंत्र की कहानियाँ

Up next · Episode 12 of 25

सच्ची मित्रता और भालू की सीख

  1. बातूनी कछुआ - एक जानलेवा चुप्पी

    Ep 14:0764 plays

  2. नेवले का बलिदान - पंचतंत्र की कहानी

    Ep 25:5814 plays

  3. बंदर और मगरमच्छ

    Ep 31:2713 plays3 ✦

  4. नीला सियार

    Ep 42:085 plays3 ✦

  5. चालाक बगुला और समझदार केकड़ा

    Ep 54:0060 plays3 ✦

  6. पंचतंत्र की मित्रता: चूहों और हाथियों की कथा

    Ep 63:315 plays3 ✦

  7. चालाक खरगोश और शेर का अक्स

    Ep 74:057 plays3 ✦

  8. कौए और सियार की चालाकी: पंचतंत्र की कहानी

    Ep 83:215 plays3 ✦

  9. सांप, नेवला और अधीर माँ: पंचतंत्र की सीख

    Ep 93:393 plays3 ✦

  10. शेर और चूहे की दोस्ती: ईसप की सीख

    Ep 103:171 play3 ✦

  11. लोमड़ी और खट्टी अंगूर की कहानी (ईसप की कथा)

    Ep 113:353 ✦

  12. सच्ची मित्रता और भालू की सीख

    Ep 123:0016 plays3 ✦

  13. चालाक कौआ और घड़े की सीख

    Ep 133:423 ✦

  14. चालाक गीदड़ और भूखा बाघ: लोककथा की सीख

    Ep 143:233 ✦

  15. चालाक सियार और भोला हिरन: पंचतंत्र की सीख

    Ep 153:543 ✦

  16. ब्राह्मण, बकरी और तीन चालाक चोरों की कहानी

    Ep 163:203 plays3 ✦

  17. बंदर की नकलची आदत और दुखद सजा

    Ep 173:543 ✦

  18. शेर, ऊँट और चालाक सियार की कहानी

    Ep 183:413 ✦

  19. शेर की खाल में गधा: पंचतंत्र की सीख

    Ep 192:553 ✦

  20. धर्म की परीक्षा: राजकुमार की अनोखी परीक्षा

    Ep 203:453 plays3 ✦

  21. बलिदानी बंदर राजाः एक प्रेरणादायक जातक कथा

    Ep 213:543 ✦

  22. खरगोश का त्याग: एक प्रेरणादायक कहानी

    Ep 223:573 ✦

  23. ईर्ष्या की आग: रानी, हाथी और पूर्व जन्म की कथा

    Ep 234:093 ✦

  24. सुनहरे हिरण राजा की करुणा और बलिदान

    Ep 244:053 ✦

  25. हँसी का इलाज: राजा और वैद्य की कहानी

    Ep 254:153 ✦

About This Story

Story Transcript

एक घना जंगल था, जहाँ तरह-तरह के जानवर रहते थे। उन्हीं में से एक थी चालाक लोमड़ी, जिसका नाम था लीला। लीला बहुत समझदार और तेज-तर्रार थी। वह हर मुसीबत का हल अपनी चतुराई से निकाल लेती थी। एक दिन की बात है। दोपहर का समय था, सूरज गर्मी से झुलसा रहा था, और लीला बहुत भूखी थी। वह भोजन की खोज में जंगल में इधर-उधर घूम रही थी, मगर उसे कहीं कुछ खाने को नहीं मिल रहा था। चलते-चलते लीला एक बगीचे के पास पहुँची। उस बगीचे में अंगूर की एक बेल फैली हुई थी, जिस पर हरे-हरे, रसीले अंगूर बड़े सुन्दर लग रहे थे। लीला की नजर जैसे ही उन अंगूरों पर पड़ी, उसके मुँह में पानी आ गया। उसने सोचा, “अगर ये अंगूर मुझे मिल जाएँ, तो मेरी भूख शांत हो जाएगी।” लीला ने देखा कि अंगूर की बेल थोड़ी ऊँचाई पर थी। अंगूर उसके लिए पहुँच से बाहर थे। मगर उसकी भूख ने उसे मेहनत करने के लिए मजबूर कर दिया। लीला ने दौड़कर एक जोरदार छलांग लगाई, लेकिन वह अंगूर तक नहीं पहुँच पाई। उसने फिर से कोशिश की, इस बार और भी जोर से कूदी, मगर अंगूर उसकी पकड़ से दूर ही रहे। गर्मी और थकावट के बावजूद लीला ने हार नहीं मानी। वह बार-बार उछलती रही, बार-बार कूदती रही, लेकिन अंगूर हर बार उसकी पहुँच से दूर ही रहते। अब लीला थककर चूर हो चुकी थी। उसका गला सूख गया था, साँसें तेज हो रही थीं, और शरीर पसीने से तरबतर था। कुछ देर बाद, लीला ने स्वयं से कहा, “ये अंगूर तो वैसे भी खट्टे हैं। अगर मुझे मिल भी जाते, तो क्या फायदा? इनका स्वाद अच्छा नहीं होता।“ यह कहकर लीला वहाँ से टहलती हुई चली गई। बगीचे के पास बैठी एक नन्हीं गिलहरी लीला की सारी कोशिशें देख रही थी। वह लीला के पास आई और बोली, “लीला दीदी, क्या आपको सच में लगता है कि अंगूर खट्टे हैं?” लीला मुस्कराई और बोली, “जब कोई चीज़ हमें आसानी से नहीं मिलती, तो हम उसकी कीमत कम समझने लगते हैं।“ गिलहरी ने कहा, “पर अगर आप थोड़ी और कोशिश करतीं, तो शायद अंगूर मिल जाते।” लीला ने गिलहरी की बात ध्यान से सुनी। उसने सोचा, “शायद मैं जल्दी हार मान गई। अगर मैं कुछ और कोशिश करती, या कोई तरीका निकालती, तो अंगूर मेरे हो सकते थे।“ लीला को अपनी गलती का एहसास हुआ, लेकिन अब वह बहुत थक चुकी थी। उसने गिलहरी से कहा, “तुम्हारी बात सही है। कभी-कभी हमें मुश्किल समय में हार मानने की बजाय, धैर्य और मेहनत से काम लेना चाहिए।“ गिलहरी ने हँसते हुए कहा, “सच्ची कोशिश करने वालों की हार कभी नहीं होती, दीदी!” लीला ने भी मुस्कराकर उसका साथ दिया और दोनों कहीं दूर, छाँव में बैठकर आराम करने लगीं। इस तरह, लीला ने सीखा कि जब किसी चीज़ को पाने की कोशिश में असफल हो जाएँ, तो उसका अपमान करना या उसे तुच्छ बताना सही नहीं है। कभी-कभी, थोड़ी सी और मेहनत और धैर्य से हम अपनी मंज़िल पा सकते हैं। इसीलिए कहते हैं— जो चीज़ हमें नहीं मिलती, उसे खट्टा कह देना हमारी कमजोरी को छुपाना है। इंसान को कभी भी अपनी असफलता को छुपाने के लिए बहाना नहीं बनाना चाहिए। कहानी की शिक्षा: जो चीज़ हमें न मिले, उसे बुरा या तुच्छ बताना ठीक नहीं। कोशिश करते रहिए, और अगर असफल भी हो जाएँ, तो सच्चाई स्वीकार करें, बहाने न बनाएँ। यही असली सफलता है।