धर्म की परीक्षा: राजकुमार की अनोखी परीक्षा
Folklore

धर्म की परीक्षा: राजकुमार की अनोखी परीक्षा

इस जातक कथा में एक राजकुमार अपने धर्म की परीक्षा के लिए धन, परिवार और सुख-शांति त्याग देता है, लेकिन अंत में देवता उसकी निष्ठा देखकर सब कुछ लौटा देते ...

3 PLAYS
by Storiyaa Editorial
पंचतंत्र की कहानियाँ

Episode 20 of 25

पंचतंत्र की कहानियाँ

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बलिदानी बंदर राजाः एक प्रेरणादायक जातक कथा

  1. बातूनी कछुआ - एक जानलेवा चुप्पी

    Ep 14:0764 plays

  2. नेवले का बलिदान - पंचतंत्र की कहानी

    Ep 25:5814 plays

  3. बंदर और मगरमच्छ

    Ep 31:2713 plays3 ✦

  4. नीला सियार

    Ep 42:085 plays3 ✦

  5. चालाक बगुला और समझदार केकड़ा

    Ep 54:0060 plays3 ✦

  6. पंचतंत्र की मित्रता: चूहों और हाथियों की कथा

    Ep 63:315 plays3 ✦

  7. चालाक खरगोश और शेर का अक्स

    Ep 74:057 plays3 ✦

  8. कौए और सियार की चालाकी: पंचतंत्र की कहानी

    Ep 83:215 plays3 ✦

  9. सांप, नेवला और अधीर माँ: पंचतंत्र की सीख

    Ep 93:393 plays3 ✦

  10. शेर और चूहे की दोस्ती: ईसप की सीख

    Ep 103:171 play3 ✦

  11. लोमड़ी और खट्टी अंगूर की कहानी (ईसप की कथा)

    Ep 113:353 ✦

  12. सच्ची मित्रता और भालू की सीख

    Ep 123:0016 plays3 ✦

  13. चालाक कौआ और घड़े की सीख

    Ep 133:423 ✦

  14. चालाक गीदड़ और भूखा बाघ: लोककथा की सीख

    Ep 143:233 ✦

  15. चालाक सियार और भोला हिरन: पंचतंत्र की सीख

    Ep 153:543 ✦

  16. ब्राह्मण, बकरी और तीन चालाक चोरों की कहानी

    Ep 163:203 plays3 ✦

  17. बंदर की नकलची आदत और दुखद सजा

    Ep 173:543 ✦

  18. शेर, ऊँट और चालाक सियार की कहानी

    Ep 183:413 ✦

  19. शेर की खाल में गधा: पंचतंत्र की सीख

    Ep 192:553 ✦

  20. धर्म की परीक्षा: राजकुमार की अनोखी परीक्षा

    Ep 203:453 plays3 ✦

  21. बलिदानी बंदर राजाः एक प्रेरणादायक जातक कथा

    Ep 213:543 ✦

  22. खरगोश का त्याग: एक प्रेरणादायक कहानी

    Ep 223:573 ✦

  23. ईर्ष्या की आग: रानी, हाथी और पूर्व जन्म की कथा

    Ep 234:093 ✦

  24. सुनहरे हिरण राजा की करुणा और बलिदान

    Ep 244:053 ✦

  25. हँसी का इलाज: राजा और वैद्य की कहानी

    Ep 254:153 ✦

About This Story

Story Transcript

एक समय की बात है, प्राचीन भारत के एक समृद्ध राज्य में प्रताप नामक एक राजकुमार रहता था। प्रताप बचपन से ही बहुत दयालु, न्यायप्रिय और धर्मनिष्ठ था। राज्य के सभी लोग उसके गुणों की सराहना करते थे। प्रताप के पिता, महाराज सोमेश्वर, अक्सर उससे कहते, "सच्चा राजा वही है, जो धर्म के रास्ते से कभी न डिगे।" प्रताप ये बातें अपने मन में गहराई से बसा लेता था। समय के साथ प्रताप के पिता वृद्ध हुए और प्रताप को राजा घोषित किया गया। राज्य की जिम्मेदारी संभालते ही प्रताप ने गरीबों की मदद, न्याय का पालन और दया का मार्ग अपनाया। उसका परिवार, जिसमें उसकी पत्नी रानी सुरभि और दो छोटे बच्चे थे, उससे बहुत प्रेम करता था। एक दिन, देवताओं ने सोचाः "क्या प्रताप का धर्म केवल दिखावा है, या वह सच्चे हृदय से धर्मनिष्ठ है?" वे उसकी परीक्षा लेना चाहते थे। देवताओं ने एक साधु का रूप धारण किया और प्रताप की सभा में पहुँचे। साधु ने कहा, "राजन! मैं धर्म की खोज में हूँ। आप मुझे कुछ अपना सबसे प्रिय दान देंगे?" प्रताप ने मुस्कराकर कहा, "महाराज! जो भी आप मांगें, मैं देने को तैयार हूँ।" साधु बोले, "अगर आपकी निष्ठा सच्ची है, तो मुझे अपने खजाने की सारी संपत्ति दान कर दीजिए।" प्रताप ने बिना हिचकिचाए राज्य का सारा धन, गहने और कीमती वस्त्र साधु को दे दिए। अब किले का कोष खाली हो चुका था। साधु ने फिर पूछा, "राजन, क्या आप मुझे अपने बच्चों को भी दान कर सकते हैं?" यह सुनकर सभा में सन्नाटा छा गया। प्रताप की आंखों में एक क्षण के लिए पीड़ा झलक उठी, लेकिन उसने अपने बच्चों को पास बुलाया और साधु के चरणों में समर्पित कर दिया। उसकी पत्नी सुरभि की आंखें नम हो गईं। साधु ने आखिरी बार कहा, "राजन, क्या आप अपनी पत्नीको भी मुझे समर्पित करेंगे?" सुरभि ने प्रताप का हाथ पकड़कर कहा, "स्वामी, धर्म के लिए मैं भी समर्पित हूं।" प्रताप ने गहरी सांस ली और पत्नी का हाथ पकड़ साधु को सौंप दिया। अब प्रताप के पास कोई धन, परिवार या सुख-शांति नहीं बची थी। वह खाली हाथ सभा में बैठ गया। साधु ने पूछा, "राजन, तुम्हारे पास अब कुछ नहीं, फिर भी कोई दुख या पछतावा है?" प्रताप ने शांत स्वर में उत्तर दिया, "महाराज, धर्म का पालन ही मेरा सच्चा सुख है। परिवार, धन और सुख-शांति तो जीवन की अस्थायी वस्तुएं हैं। अगर भगवान ने चाहा, तो वह सब कुछ फिर लौटाएंगे।" तभी साधु का रूप बदल गया। वह देवराज इन्द्र के रूप में प्रकट हुए। सभा में दिव्य प्रकाश फैल गया। इन्द्र बोले, "राजन, तुम्हारी निष्ठा, त्याग और धर्मपालन से हम अत्यंत प्रसन्न हैं। तुम्हारा यह त्याग पूरी मानवता के लिए अनुकरणीय है।" इन्द्र ने अपने वरदहस्त से प्रताप के परिवार को वापस उसकी गोद में ला दिया। खोया हुआ धन, राज्य और संपत्ति सब लौट आई। प्रताप और उसकी रानी, दोनों भावुक होकर देवताओं को प्रणाम करने लगे। इन्द्र ने आशीर्वाद देते हुए कहा, "राजन प्रताप, तुम्हारा नाम युगों-युगों तक धर्म, त्याग और सत्य के लिए याद किया जाएगा।" इसके बाद प्रताप और उसका परिवार प्रसन्नता से राज्य की सेवा करने लगे। प्रताप के राज्य में सुख, शांति और समृद्धि लौट आई। इस कहानी से हमें यही शिक्षा मिलती है—सच्चा धर्म उपकार, त्याग और सत्य की राह पर चलना है। जब हम सच्चे मन से धर्म का पालन करते हैं, तो भगवान स्वयं हमारी रक्षा करते हैं।