मिट्टी की खुशबू
Educational

मिट्टी की खुशबू

3 PLAYS
by Storiyaa Editorial
Hindi Classic-Inspired Tales (hi)

Episode 1 of 3

Hindi Classic-Inspired Tales (hi)

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नमक का दरोगा | Namak Ka Daroga

Story Transcript

अरुण एक छोटे से गांव बेलगांव पर का लड़का था। गांव में उसका नाम था। सपने वाला लड़का हर कोई कहता यह अरुण आसमान छूने की बातें करता है। उसे शहर जाकर पढ़ने का बहुत शौक था। पर हालात उसके खिलाफ थे। पिता किसान थे जो कर्ज में डूबे रहते और मां रोज मर्रा की जरूरत के लिए जूझती रहती। एक दिन अरुण खेत में काम करते हुए मिट्टी को हाथों में मसाला रहा था। उसने पिता से पूछा बाबा क्या मैं भी इस मिट्टी की तरह कुछ उग सकता हूं। कुछ बड़ा। पिता ने मुस्कुरा कर कहा बिल्कुल मगर पहले इस मिट्टी की मेहनत समझा। वो दिन अरुण के लिए नया मोड़ था। दिन भर मिट्टी में काम और रात को खेत की मेड़ पर बैठकर पुराने अखबारों से अंग्रेजी सीखना उसका रूटीन बन गया। गांव के लोग उसकी हंसी उड़ाते भाई शहर वाले बनोगे। क्या वह मुस्कुरा कर कहता पर अपनी मिट्टी की खुशबू साथ? लेकर कुछ साल बाद उसने छात्रवृत्ति के जरिए इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिला पा लिया। लेकिन शहर उसके लिए जंगल जैसा था। नया अजनबी और महंगा हॉस्टल में रहते हुए वह अक्सर आधा पेट खाता, नंगे पांव कॉलेज जाता और रात को सड़क की बत्ती के नीचे किताबें पढ़ना। एक दिन उसके प्रोफेसर ने क्लास में पूछा। कौन बता सकता है की असली नवाचार क्या होता है। अरुण ने जवाब दिया जब इंसान अपनी जरूरत से दुनिया की जरूरत बना दे, वही नवाचार है। सब ने ताली बजाई लेकिन किसी को नहीं पता था। वही लड़का जल्द कुछ ऐसा करेगा जो देश को गर्व महसूस कराएगा। अरुण की अंतिम वर्ष की परियोजना थी। सस्ती सौर ऊर्जा उपकरण जो कामों तक बिजली पहुंच सके। शुरुआत में कोई निवेशक उसे गंभीरता से नहीं लेता था। उसे कहा गया बिजली गांव तक पहुंचाना बच्चों का खेल नहीं है मगर अरुण ने। नहीं मानी। उसने स्क्रैप मैटेरियल से प्रोटोटाइप बनाया और अपने गांव में उसका पहला प्रयोग किया। कुछ ही महीना में गांव के कुछ घरों में रोशनी जल उठी। मां की आंखें चमक उठी और पिता ने वर्षों बाद कहा। आज हमारे खेत की मिट्टी ने सच में सोना उगा है। कुछ समय बाद इस प्रोजेक्ट को सरकार ने अपनाया। अरुण ने मिट्टी एनर्जी नाम का स्टार्टअप शुरू किया जो भारत के गांव को सौर ऊर्जा से जोड़ने लगा। इंटरव्यू में जब उससे पूछा गया आपकी प्रेरणा क्या थी वो मुस्कुराया और बोला मेरे गांव की वह मिट्टी जो हर बार गिरने पर भी मुझे खड़ा होना सिखाती रही। अब अरुण गांव में बच्चों को पढ़ना नहीं भूलता। वह हर साल अपने स्कूल में जाता है और बच्चों से कहता है सपने देखो पर पैरों की मिट्टी मत भूलो गांव वाले अब भी कहते हैं। यह अरुण बस सपने ही नहीं देखा उन्हें। सरकार भी करता है।