तेनालीराम और दिव्य बैंगन की चोरी
Folklore

तेनालीराम और दिव्य बैंगन की चोरी

जब तेनालीराम ने राजा के बाग से दिव्य बैंगन चुराए, उनका बेटा गलती से राज़ खोल बैठा। तेनाली की चतुराई ने उन्हें सजा से बचा लिया और राजा को भी हैरान कर द...

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by Storiyaa Editorial

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विजयनगर साम्राज्य में तेनालीराम की बुद्धिमानी के किस्से दूर-दूर तक प्रसिद्ध थे। राजा कृष्णदेवराय भी उनकी चतुराई के कायल थे, पर तेनाली की शरारतें कभी खत्म नहीं होती थीं। एक दिन तेनालीराम की पत्नी, लक्ष्मी, रसोई में उदास बैठी थी। तेनाली ने पूछा, “क्या बात है, लक्ष्मी? आज इतनी चुप क्यों हो?” लक्ष्मी ने लंबी सांस ली, “सुनो जी, सुना है राजमहल के बाग में ऐसे बैंगन लगते हैं, जिनका स्वाद पूरे राज्य में नहीं मिलता। अगर एक बार वे बैंगन मिल जाएं, तो तुम्हारे लिए खास व्यंजन बनाऊं।” तेनाली को अपनी पत्नी की खुशी सबसे प्यारी थी। लेकिन वे जानते थे कि राजा का बाग आम लोगों के लिए वर्जित था और उन दिव्य बैंगनों की बहुत रखवाली होती थी। फिर भी तेनाली ने ठान लिया कि वे अपनी पत्नी की इच्छा पूरी करेंगे। रात ढलने पर तेनाली चुपचाप बाग की ओर निकल पड़े। गहरे अंधेरे में दीवार फांदी, सतर्कता से पहरेदारों को चकमा दिया और सबसे सुर्ख, चमकदार बैंगन तोड़ लाए। घर पहुँचते ही लक्ष्मी की आँखों में चमक आ गई। अगली सुबह तेनाली के बेटे रामू ने बैंगन की सब्ज़ी देखी तो हैरान रह गया। “माँ, ये बैंगन तो राजा के बागवाले जैसे दिख रहे हैं!” लक्ष्मी ने मुस्कुरा कर कहा, “बस चुप रहो, ये बात किसी से मत कहना। तुम्हारे बाबूजी ने कितनी मुश्किल से लाए हैं।” रामू बच्चा था, मन में सवालों का सैलाब उमड़ पड़ा। पर उसने माँ की बात मान ली। लेकिन बच्चों के मन में राज़ ज्यादा देर नहीं टिकते। दूसरे दिन राजा कृष्णदेवराय अपने बाग में घूम रहे थे। अचानक उन्होंने देखा कि सबसे बड़े बैंगन गायब हैं। वे भड़क उठे। दरबार में घोषणा हुई—“जो भी बैंगन चुराएगा, उसे कड़ी सज़ा मिलेगी।” अगले दिन तेनालीराम राजदरबार में पहुंचे। रामू भी उनके साथ आ गया। दरबार में सब बैंगन की चोरी का मुद्दा ही चर्चा में था। तभी अचानक रामू ने सबके सामने कह दिया, “बाबा, वो बैंगन तो आपने ही लाए थे ना, कल रात?” पूरे दरबार में सन्नाटा छा गया। राजा ने कठोर स्वर में पूछा, “तेनाली, क्या ये सच है?” तेनाली की चतुराई जाग गई। वे बोले, “महाराज, बच्चों की बातें कभी-कभी सपनों जैसी होती हैं। रामू रात को गहरी नींद में था, शायद उसे कोई सपना आया होगा।” राजा ने गंभीरता से रामू से पूछा, “बेटा, अपने आप बताओ, क्या तुमने सच में अपने पिता को बैंगन लाते देखा?” रामू ने उलझन में सिर हिलाया, “हाँ, महाराज, मैंने देखा… और फिर बारिश भी हो रही थी!” दरबार में लोग हैरान रह गए। राजा बोले, “बारिश? कल तो आसमान एक दम साफ था!” तेनाली ने मुस्कुराते हुए कहा, “महाराज, मैंने रात रामू को सोता पाया। उसके ऊपर पानी गिरा दिया और जब वह उठा, तो कहा कि बारिश हो रही है। वह अब भी आधी नींद में था। बच्चों को सपनों और हकीकत में फर्क नहीं समझ आता।” राजा ने थोड़ी देर सोचा। फिर बोले, “तेनाली, सचमुच तुम्हारी बात में दम है। बच्चों की बातें हमेशा सच नहीं होती। शायद रामू ने सपना देखा हो।” दरबार में सभी हँस पड़े। तेनाली ने सिर झुका लिया, मन ही मन राहत की सांस ली। राजा ने हँसते हुए आदेश दिया, “तेनाली, अगली बार अगर तुम्हारी पत्नी को दिव्य बैंगन खाने का मन हो, तो मुझसे मांगा करो। चोरी करना अच्छी बात नहीं, लेकिन तुम्हारी चतुराई की जितनी तारीफ करूं, उतनी कम है।” तेनाली ने झुककर राजा को प्रणाम किया और रामू का हाथ पकड़कर बाहर निकल गए। रास्ते में रामू ने पूछा, “बाबा, सच में क्या मैंने सपना देखा था?” तेनाली मुस्कराए, “बेटा, कई बार सच को भी सपने की तरह पेश करना पड़ता है। यही तो है असली