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रात की शांत आकाश में असंख्य तारों का समुन्दर फैला था। पर इन सब में भी एक दीप्तिमान क्रम्म था जो सदियों से लोग देखते आ हैं, पर हर युग में एक प्रश्न वही रहता है - ये सप्तर्षि आखिर कौन हैं?
इस प्रश्न का उत्तर साधारण नहीं, क्योंकि यह कहानी सिर्फ तारों की नहीं, यह भारत की जड़ों, इसके धर्म, इसके ज्ञान और इसके प्राचीनतम ऋषियों की अमर यात्रा है।
कहते हैं कि जब सृष्टि का आरंभ हो, सूर्य भी अपने पहले किरण खो रहा था, दिशाएं मौन थीं और समय स्वयं शून्य में ठहरी श्वास की तरह था। तभी ब्रह्मा ने अपने तप शक्ति से सात महान ऋषियों को उत्पन्न किया। वे किसी माता के गर्भ से नहीं आए, वे मानस पुत्र थे - संकल्प से जन्मे, तप से पोषित और सत्य के दीपक।