▶Story Transcript
यह कहानी उस समय की है जब नमक पर भारी सरकारी कर लगा दिया गया था और इसकी तस्करी कम बात ही एक थी। इसी में एक स्वाभिमानी और ईमानदार नौजवान, रामेश्वर प्रसाद, सरकारी नौकरी में 'नमक का दरोगा' नियुक्त होते। इस समय यह पद बहुत ताकतवर माना जाता था क्योंकि इसमें रिश्वत की अपार संभावनाएं थीं। लोग इसे 'ऊपरी आमाद' का बेहतरीन करियां मानते थे, लेकिन रामेश्वर के अंदर अपने ईमानदारी साबित करने की जक्क थी।