शेर, ऊँट और चालाक सियार की कहानी
Folklore

शेर, ऊँट और चालाक सियार की कहानी

शेर के दरबार में एक भोला ऊँट आ जाता है, पर चालाक सियार उसकी जान के पीछे पड़ जाता है। जानिए कैसे बुद्धि और स्वार्थ की यह कहानी एक महत्वपूर्ण शिक्षा देत...

by Storiyaa Editorial
पंचतंत्र की कहानियाँ

Episode 18 of 25

पंचतंत्र की कहानियाँ

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शेर की खाल में गधा: पंचतंत्र की सीख

  1. बातूनी कछुआ - एक जानलेवा चुप्पी

    Ep 14:0764 plays

  2. नेवले का बलिदान - पंचतंत्र की कहानी

    Ep 25:5814 plays

  3. बंदर और मगरमच्छ

    Ep 31:2713 plays3 ✦

  4. नीला सियार

    Ep 42:085 plays3 ✦

  5. चालाक बगुला और समझदार केकड़ा

    Ep 54:0060 plays3 ✦

  6. पंचतंत्र की मित्रता: चूहों और हाथियों की कथा

    Ep 63:315 plays3 ✦

  7. चालाक खरगोश और शेर का अक्स

    Ep 74:057 plays3 ✦

  8. कौए और सियार की चालाकी: पंचतंत्र की कहानी

    Ep 83:215 plays3 ✦

  9. सांप, नेवला और अधीर माँ: पंचतंत्र की सीख

    Ep 93:393 plays3 ✦

  10. शेर और चूहे की दोस्ती: ईसप की सीख

    Ep 103:171 play3 ✦

  11. लोमड़ी और खट्टी अंगूर की कहानी (ईसप की कथा)

    Ep 113:353 ✦

  12. सच्ची मित्रता और भालू की सीख

    Ep 123:0016 plays3 ✦

  13. चालाक कौआ और घड़े की सीख

    Ep 133:423 ✦

  14. चालाक गीदड़ और भूखा बाघ: लोककथा की सीख

    Ep 143:233 ✦

  15. चालाक सियार और भोला हिरन: पंचतंत्र की सीख

    Ep 153:543 ✦

  16. ब्राह्मण, बकरी और तीन चालाक चोरों की कहानी

    Ep 163:203 plays3 ✦

  17. बंदर की नकलची आदत और दुखद सजा

    Ep 173:543 ✦

  18. शेर, ऊँट और चालाक सियार की कहानी

    Ep 183:413 ✦

  19. शेर की खाल में गधा: पंचतंत्र की सीख

    Ep 192:553 ✦

  20. धर्म की परीक्षा: राजकुमार की अनोखी परीक्षा

    Ep 203:453 plays3 ✦

  21. बलिदानी बंदर राजाः एक प्रेरणादायक जातक कथा

    Ep 213:543 ✦

  22. खरगोश का त्याग: एक प्रेरणादायक कहानी

    Ep 223:573 ✦

  23. ईर्ष्या की आग: रानी, हाथी और पूर्व जन्म की कथा

    Ep 234:093 ✦

  24. सुनहरे हिरण राजा की करुणा और बलिदान

    Ep 244:053 ✦

  25. हँसी का इलाज: राजा और वैद्य की कहानी

    Ep 254:153 ✦

About This Story

Story Transcript

बहुत समय पहले, घने जंगल के बीच एक ताकतवर शेर रहता था। उसका नाम सिंह था और उसके दरबार में दो खास सलाहकार भी थे — एक था चालाक सियार, जिसका नाम था चंचल, और दूसरा था एक बुद्धिमान कौआ, जिसका नाम था कालू। एक दिन शेर शिकार की तलाश में जंगल के बाहर निकल गया। चलते-चलते वह रेगिस्तान की ओर चला गया और वहाँ उसे एक ऊँट दिखाई दिया। ऊँट अपने झुंड से बिछड़ गया था और रास्ता भटक गया था। वह भूखा-प्यासा और बेहद डरा हुआ था। शेर ने ऊँट की हालत देखी और उससे पूछा, "तुम कौन हो और यहाँ क्यों भटक रहे हो?" ऊँट ने काँपती आवाज़ में जवाब दिया, "महाराज, मैं अपने परिवार से बिछड़ गया हूँ। मैं बस आपकी शरण चाहता हूँ।" शेर की दरियादिली जागी। उसने ऊँट को अपनी सुरक्षा में लेने का वचन दिया और अपने दरबार में ले आया। ऊँट का नाम था समीर। कालू और चंचल ने ऊँट का स्वागत किया, पर चंचल सियार के मन में कुछ और ही चल रहा था। समय बीतता गया। ऊँट, शेर और उसके सलाहकारों के साथ रहने लगा। वह वफादार था और जंगल के नियमों का सम्मान करता था। लेकिन एक दिन शेर गंभीर रूप से बीमार पड़ गया। वह शिकार करने में असमर्थ था, और दरबार में भूख का माहौल छा गया। शेर ने चंचल और कालू से कहा, "कुछ ऐसा उपाय सोचो ताकि हम सबका पेट भर सके।" चंचल सियार की नज़र ऊँट पर थी। उसने मन ही मन सोचा, "ऊँट तो यहाँ पराया है, अगर शेर उसे मार दे, तो अच्छा भोजन मिलेगा।" पर शेर ने ऊँट से वादा किया था कि वह उसकी रक्षा करेगा। चंचल जानता था कि सीधे-सीधे शेर ऊँट को नहीं मारेगा, इसलिए उसने एक चाल चली। चंचल ने दरबार में कहा, "महाराज, हमें किसी का बलिदान चाहिए ताकि आप स्वस्थ हो सकें। मैं अपना जीवन आपके लिए देने को तैयार हूँ।" कालू कौआ बोला, "महाराज, आप चाहें तो मुझे खा सकते हैं।" समीर ऊँट ने भी मासूमियत से कहा, "महाराज, अगर मेरा जीवन आपके काम आ सके, तो मैं भी अपने प्राण देने को तैयार हूँ।" शेर अभी भी ऊँट को मारने के लिए तैयार नहीं था। पर चंचल ने शेर के कान में फुसफुसाया, "महाराज, जब ऊँट ने स्वयं अपना बलिदान देने को कहा है, तो अब आप उसकी बात मान सकते हैं।" शेर भूखा था और चंचल की बातों में आ गया। उसने ऊँट को मार दिया और दरबार में सबने पेट भरकर ऊँट का मांस खाया। भोजन के बाद, चंचल सियार ने जी भरकर डकार ली और बोला, "महाराज, आज तो बहुत तृप्ति मिली। पर ऊँट की मासूमियत देखिए, यह जान कर भी कि हमारी नियत ठीक नहीं थी, फिर भी उसने अपने प्राण देने को कहा।" शेर को अपनी गलती का एहसास हुआ। वह बोला, "मैंने अपने वचन का पालन नहीं किया। मुझे ऊँट के साथ विश्वासघात नहीं करना चाहिए था।" कालू कौआ सोच में डूब गया, "जो वफादार होते हैं, अक्सर अपनी सरलता के कारण दूसरों की चाल का शिकार बन जाते हैं।" शेर ने ठान लिया कि अब से वह कभी किसी भोले पर विश्वासघात नहीं करेगा, भले ही परिस्थिति कितनी भी कठिन क्यों न हो। इस कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है कि सच्चाई और वफादारी की हमेशा कद्र करनी चाहिए और कभी किसी भोले या वफादार का विश्वास नहीं तोड़ना चाहिए। चालाकी और स्वार्थ का रास्ता अंत में पछतावे की ओर ही ले जाता है।