तीन जानवरों की कहानी, जो एक पेड़ के पास मिलते हैं और सबसे बड़े को सम्मान देना सीखते हैं। यह कथा बच्चों को उम्र और अनुभव का महत्व सिखाती है।
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by Storiyaa Editorial
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Story Transcript
बहुत समय पहले की बात है, एक घने जंगल के बीचोंबीच एक विशाल और पुराना पेड़ खड़ा था। उस पेड़ की छाया इतनी घनी थी कि दोपहर की तेज़ धूप भी वहां नहीं पहुँच पाती थी। एक दिन, एक युवा हिरण लंबी दौड़ के बाद थक कर उस पेड़ के नीचे आकर बैठ गया। उसने राहत की सांस ली और अपने चारों ओर के शांत वातावरण को निहारने लगा।
कुछ ही देर में, वहाँ एक बंदर आया। उसकी पूँछ झूलती हुई, वह फुर्ती से पेड़ की सबसे निचली डाली पर चढ़ गया। बंदर ने नीचे बैठे हिरण को देखा और मुस्कुराते हुए कहा, "क्या मैं भी यहाँ बैठ सकता हूँ? यह पेड़ तो बड़ा आरामदायक लगता है!"
हिरण ने हँसते हुए उत्तर दिया, "क्यों नहीं! यहाँ सभी का स्वागत है।"
तभी, वहाँ एक भारी-भरकम हाथी भी आया। उसने अपने विशाल कान हिलाए और सूँड़ से पत्तियाँ तोड़ते हुए कहा, "मैं भी इस छांव का आनंद लेना चाहता हूँ। क्या आप दोनों को कोई आपत्ति है?"
हिरण और बंदर एक स्वर में बोले, "बिल्कुल नहीं, यह पेड़ सभी के लिए है।"
तीनों जानवर पेड़ की छाया में खुशी-खुशी बैठ गए। लेकिन थोड़ी ही देर में उनके बीच एक बात को लेकर बहस शुरू हो गई। यह बहस थी कि पेड़ पर सबसे पहला अधिकार किसका है। बंदर ने कहा, "मैं तो पेड़ पर रहता हूँ, इसलिए इस पर सबसे पहले मेरा अधिकार है।"
हिरण बोला, "लेकिन मैं यहाँ सबसे पहले आया, इसलिए मुझे पहली जगह मिलनी चाहिए।"
हाथी ने गर्व से कहा, "मैं सबसे बड़ा और ताकतवर हूँ, इसीलिए मेरा अधिकार सबसे ज्यादा है।"
धीरे-धीरे, बहस इतनी बढ़ गई कि उनकी आवाजें पूरी जंगल में गूंजने लगीं। उसी समय, पास ही एक बुद्धिमान उल्लू अपने घोंसले से निकला। उसने उनकी बहस सुनी और मुस्कुराकर नीचे आ गया।
उल्लू ने शांत स्वर में कहा, "तुम सब क्यों झगड़ रहे हो? क्या तुम यह नहीं जानते कि यह पेड़ तुम सब से भी पुराना है? अगर इस पेड़ को बोलने की ताकत होती, तो वह खुद बताता कि उसकी सबसे ज्यादा इज्जत किसे देनी चाहिए।"
तीनों जानवर उल्लू की बात सुनकर चुप हो गए। उल्लू ने आगे कहा, "इस पेड़ को सबसे पहले किसने देखा, यह जानना चाहोगे?"
तीनों ने सिर हिलाकर हामी भरी।
उल्लू बोला, "तो आओ, हम सब पेड़ से उसके जीवन की कहानी सुनें।"
उल्लू ने पेड़ के तने को गौर से देखा और उसकी छाल के निशानों को पढ़ना शुरू किया। फिर उसने कहा, "यह पेड़ इतना पुराना है कि जब तुम्हारे दादा-दादी भी छोटे थे, तब भी यह यहाँ था। इसका मतलब है, इस पेड़ की उम्र तुम सब से कहीं ज़्यादा है।"
हाथी ने सिर झुकाकर कहा, "मैं समझ गया, हमें सबसे बड़े और पुराने को सम्मान देना चाहिए।"
बंदर बोला, "सच कहा, इस पेड़ ने न जाने कितने जानवरों को छांव और फल दिए हैं।"
हिरण ने भी सहमति में सिर हिलाया, "हमें झगड़ना नहीं चाहिए, बल्कि पेड़ का आदर करना चाहिए।"
तीनों जानवर पेड़ के पास गए और बोले, "हे पुराने पेड़, हमें माफ़ कर दो। हमने तुम्हारे अनुभव और उम्र का सम्मान नहीं किया। आगे से हम हमेशा तुम्हारी इज्जत करेंगे।"
पेड़ की शाखाएँ हल्की-सी हिलीं, मानो वह मुस्कुरा रहा हो। तीनों जानवरों ने पेड़ के नीचे मिलकर शांति से रहना सीख लिया। अब वे रोज़ वहीं मिलते, मिलकर खेलते, बातें करते और पेड़ की छांव का आनंद लेते।
धीरे-धीरे, जंगल के दूसरे जानवर भी उनसे यह सीखने लगे कि सबसे पुराने और अनुभवी की इज्जत करना कितना ज़रूरी है। जंगल में फिर से शांति और मेलजोल लौट आया।
कहानी की सीख यह है कि हमें हमेशा अपने से बड़े और अनुभवी का सम्मान करना चाहिए। अनुभव और उम्र का आदर करना हमें मिल-जुलकर रहने की राह दिखाता है।
तीन जानवरों की कहानी, जो एक पेड़ के पास मिलते हैं और सबसे बड़े को सम्मान देना सीखते हैं। यह कथा बच्चों को उम्र और अनुभव का महत्व सिखाती है।
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बहुत समय पहले की बात है, एक घने जंगल के बीचोंबीच एक विशाल और पुराना पेड़ खड़ा था। उस पेड़ की छाया इतनी घनी थी कि दोपहर की तेज़ धूप भी वहां नहीं पहुँच पाती थी। एक दिन, एक युवा हिरण लंबी दौड़ के बाद थक कर उस पेड़ के नीचे आकर बैठ गया। उसने राहत की सांस ली और अपने चारों ओर के शांत वातावरण को निहारने लगा।
कुछ ही देर में, वहाँ एक बंदर आया। उसकी पूँछ झूलती हुई, वह फुर्ती से पेड़ की सबसे निचली डाली पर चढ़ गया। बंदर ने नीचे बैठे हिरण को देखा और मुस्कुराते हुए कहा, "क्या मैं भी यहाँ बैठ सकता हूँ? यह पेड़ तो बड़ा आरामदायक लगता है!"
हिरण ने हँसते हुए उत्तर दिया, "क्यों नहीं! यहाँ सभी का स्वागत है।"
तभी, वहाँ एक भारी-भरकम हाथी भी आया। उसने अपने विशाल कान हिलाए और सूँड़ से पत्तियाँ तोड़ते हुए कहा, "मैं भी इस छांव का आनंद लेना चाहता हूँ। क्या आप दोनों को कोई आपत्ति है?"
हिरण और बंदर एक स्वर में बोले, "बिल्कुल नहीं, यह पेड़ सभी के लिए है।"
तीनों जानवर पेड़ की छाया में खुशी-खुशी बैठ गए। लेकिन थोड़ी ही देर में उनके बीच एक बात को लेकर बहस शुरू हो गई। यह बहस थी कि पेड़ पर सबसे पहला अधिकार किसका है। बंदर ने कहा, "मैं तो पेड़ पर रहता हूँ, इसलिए इस पर सबसे पहले मेरा अधिकार है।"
हिरण बोला, "लेकिन मैं यहाँ सबसे पहले आया, इसलिए मुझे पहली जगह मिलनी चाहिए।"
हाथी ने गर्व से कहा, "मैं सबसे बड़ा और ताकतवर हूँ, इसीलिए मेरा अधिकार सबसे ज्यादा है।"
धीरे-धीरे, बहस इतनी बढ़ गई कि उनकी आवाजें पूरी जंगल में गूंजने लगीं। उसी समय, पास ही एक बुद्धिमान उल्लू अपने घोंसले से निकला। उसने उनकी बहस सुनी और मुस्कुराकर नीचे आ गया।
उल्लू ने शांत स्वर में कहा, "तुम सब क्यों झगड़ रहे हो? क्या तुम यह नहीं जानते कि यह पेड़ तुम सब से भी पुराना है? अगर इस पेड़ को बोलने की ताकत होती, तो वह खुद बताता कि उसकी सबसे ज्यादा इज्जत किसे देनी चाहिए।"
तीनों जानवर उल्लू की बात सुनकर चुप हो गए। उल्लू ने आगे कहा, "इस पेड़ को सबसे पहले किसने देखा, यह जानना चाहोगे?"
तीनों ने सिर हिलाकर हामी भरी।
उल्लू बोला, "तो आओ, हम सब पेड़ से उसके जीवन की कहानी सुनें।"
उल्लू ने पेड़ के तने को गौर से देखा और उसकी छाल के निशानों को पढ़ना शुरू किया। फिर उसने कहा, "यह पेड़ इतना पुराना है कि जब तुम्हारे दादा-दादी भी छोटे थे, तब भी यह यहाँ था। इसका मतलब है, इस पेड़ की उम्र तुम सब से कहीं ज़्यादा है।"
हाथी ने सिर झुकाकर कहा, "मैं समझ गया, हमें सबसे बड़े और पुराने को सम्मान देना चाहिए।"
बंदर बोला, "सच कहा, इस पेड़ ने न जाने कितने जानवरों को छांव और फल दिए हैं।"
हिरण ने भी सहमति में सिर हिलाया, "हमें झगड़ना नहीं चाहिए, बल्कि पेड़ का आदर करना चाहिए।"
तीनों जानवर पेड़ के पास गए और बोले, "हे पुराने पेड़, हमें माफ़ कर दो। हमने तुम्हारे अनुभव और उम्र का सम्मान नहीं किया। आगे से हम हमेशा तुम्हारी इज्जत करेंगे।"
पेड़ की शाखाएँ हल्की-सी हिलीं, मानो वह मुस्कुरा रहा हो। तीनों जानवरों ने पेड़ के नीचे मिलकर शांति से रहना सीख लिया। अब वे रोज़ वहीं मिलते, मिलकर खेलते, बातें करते और पेड़ की छांव का आनंद लेते।
धीरे-धीरे, जंगल के दूसरे जानवर भी उनसे यह सीखने लगे कि सबसे पुराने और अनुभवी की इज्जत करना कितना ज़रूरी है। जंगल में फिर से शांति और मेलजोल लौट आया।
कहानी की सीख यह है कि हमें हमेशा अपने से बड़े और अनुभवी का सम्मान करना चाहिए। अनुभव और उम्र का आदर करना हमें मिल-जुलकर रहने की राह दिखाता है।