एक समय की बात है। एक भूखा सियार भोजन की तलाश में एक शहर में घुस गया। वहां आवारा कुत्तों ने उसे घेर लिया। अपनी जान बचाने के लिए वो सियार भागते भागते एक रंगरेज यानी दायरे के घर में घुस गया और नीले रंग से भरे एक बड़े ड्रम में जा गिरा। जब वो बाहर निकाला तो वो सर से पर तक चमकीला नीला हो चुका था। जब वो जंगल वापस लौटा तो उसे देखकर शेर बाघ और हाथी सब डर गए। किसी ने ऐसा जीव पहले कभी नहीं देखा था। सियार ने उनकी घबराहट का फायदा उठाया और ऊंची आवाज में बोला ठहरो डरो मत मुझे स्वाइन भगवान ने भेजा है ताकि मैं इस जंगल का राजा बन सकूं। आज से तुम सब मेरे सेवक हो। सारे जानवर उसके सामने झुक गए। सियार की तो चांदी हो गई। उसे बिना शिकार किए सबसे अच्छा भोजन मिलने लगा। वह अपनी असली पहचान पूरी तरह भूल चुका था। समझे उसे लगा कि वह सच में कोई जादुई जीव है। फिर एक चांदनी रात आई सियार अपने ऊंचे सिंहासन पर बैठा था। तभी दूर से उसे सेरो के झुंड के चिल्लाने की आवाज सुनाई दी। हां हुआ वह आवाज सुनते ही नील सियार के अंदर का असली स्वभाव जाग उठा। वो भूल गया कि वो एक राजा का ढूंढ कर रहा है और उसने अपना मुंह आसमान की ओर उठाया और पूरी ताकत से चिल्लाने लगा। हां हां हां हुआ शेर और बाग चौक गए। उन्होंने एक दूसरे की ओर देखा। अरे ये तो मामूली सियार है। इसने हमें धोखा दिया। इससे पहले की नीला सियार कुछ समझ पाता। सभी जानवर उसे पर टूट पड़े। उसे अपनी जान बचाकर वहां से भागना पड़ा। उसका नीला रंग तो नहीं उतरा लेकिन उसका झूठा उतर चुका था। सिख नकली रूप और झूठ से आप कुछ समय के लिए सम्मान पा सकते हैं, लेकिन आपका असली स्वभाव कभी ना कभी सामने आ ही जाता है।