ईर्ष्या की आग: रानी, हाथी और पूर्व जन्म की कथा
Folklore

ईर्ष्या की आग: रानी, हाथी और पूर्व जन्म की कथा

जब रानी की ईर्ष्या से हाथी की मृत्यु होती है, तब एक साधु अतीत की कहानी उजागर करता है, दिखाता है कैसे कर्म और ईर्ष्या जीवनों को जोड़ते हैं।

by Storiyaa Editorial
पंचतंत्र की कहानियाँ

Episode 23 of 25

पंचतंत्र की कहानियाँ

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सुनहरे हिरण राजा की करुणा और बलिदान

  1. बातूनी कछुआ - एक जानलेवा चुप्पी

    Ep 14:0764 plays

  2. नेवले का बलिदान - पंचतंत्र की कहानी

    Ep 25:5814 plays

  3. बंदर और मगरमच्छ

    Ep 31:2713 plays3 ✦

  4. नीला सियार

    Ep 42:085 plays3 ✦

  5. चालाक बगुला और समझदार केकड़ा

    Ep 54:0060 plays3 ✦

  6. पंचतंत्र की मित्रता: चूहों और हाथियों की कथा

    Ep 63:315 plays3 ✦

  7. चालाक खरगोश और शेर का अक्स

    Ep 74:057 plays3 ✦

  8. कौए और सियार की चालाकी: पंचतंत्र की कहानी

    Ep 83:215 plays3 ✦

  9. सांप, नेवला और अधीर माँ: पंचतंत्र की सीख

    Ep 93:393 plays3 ✦

  10. शेर और चूहे की दोस्ती: ईसप की सीख

    Ep 103:171 play3 ✦

  11. लोमड़ी और खट्टी अंगूर की कहानी (ईसप की कथा)

    Ep 113:353 ✦

  12. सच्ची मित्रता और भालू की सीख

    Ep 123:0016 plays3 ✦

  13. चालाक कौआ और घड़े की सीख

    Ep 133:423 ✦

  14. चालाक गीदड़ और भूखा बाघ: लोककथा की सीख

    Ep 143:233 ✦

  15. चालाक सियार और भोला हिरन: पंचतंत्र की सीख

    Ep 153:543 ✦

  16. ब्राह्मण, बकरी और तीन चालाक चोरों की कहानी

    Ep 163:203 plays3 ✦

  17. बंदर की नकलची आदत और दुखद सजा

    Ep 173:543 ✦

  18. शेर, ऊँट और चालाक सियार की कहानी

    Ep 183:413 ✦

  19. शेर की खाल में गधा: पंचतंत्र की सीख

    Ep 192:553 ✦

  20. धर्म की परीक्षा: राजकुमार की अनोखी परीक्षा

    Ep 203:453 plays3 ✦

  21. बलिदानी बंदर राजाः एक प्रेरणादायक जातक कथा

    Ep 213:543 ✦

  22. खरगोश का त्याग: एक प्रेरणादायक कहानी

    Ep 223:573 ✦

  23. ईर्ष्या की आग: रानी, हाथी और पूर्व जन्म की कथा

    Ep 234:093 ✦

  24. सुनहरे हिरण राजा की करुणा और बलिदान

    Ep 244:053 ✦

  25. हँसी का इलाज: राजा और वैद्य की कहानी

    Ep 254:153 ✦

About This Story

Story Transcript

बहुत समय पहले मगध राज्य में चंद्रप्रभा नाम की एक रानी रहती थी। वह सुंदर, बुद्धिमान और अपने राजा की प्रिय थी। लेकिन उसके मन में एक दोष भी था—ईर्ष्या। उसका सबसे बड़ा ताज हाथी ‘राजवीर’ था, जो न केवल राज्य की शान था, बल्कि राजा का प्रिय भी था। राजा प्रताप सिंह हर सुबह राजवीर के पास जाता, उसका ध्यान रखता और कभी-कभी उससे बातें भी करता। राजवीर बहुत समझदार था, जैसे इंसानों की बातें समझ सकता हो। रानी को यह पसंद नहीं था कि राजा का इतना ध्यान एक जानवर को मिले। उसके मन में धीरे-धीरे ईर्ष्या की आग बढ़ने लगी। एक दिन दरबार में राजा ने सबके सामने कहा, “इस राज्य में राजवीर जैसा विश्वासपात्र कोई नहीं। उसकी समझदारी और वफादारी अद्भुत है।” रानी के मन में जैसे चुभन सी हुई। उसने मन ही मन ठान लिया कि वह राजवीर को अलग करेगी। कुछ दिनों बाद, रानी ने अपने विश्वासपात्र सेवक को बुलाया। “राजवीर को महल के पीछे वाले बाग में बांध दो,” उसने आदेश दिया, “और उसे खाना देना बंद कर दो।” सेवक हिचकिचाया, “महारानी, राजा को पता चला तो…” रानी ने ठंडे स्वर में कहा, “राजा से पहले मैं जान जाऊँगी। जो कहा, वही करो।” राजवीर को बाग के कोने में बांध दिया गया। उसे न ताज़ा पानी मिला, न खाना। वह धीरे-धीरे कमजोर होने लगा। उसकी आँखों में उदासी और शरीर में थकावट दिखने लगी। राजा प्रताप सिंह ने जब राजवीर को महल में न देखा, तो पूछा, “राजवीर कहाँ है?” रानी ने बड़ी सहजता से जवाब दिया, “वह कुछ बीमार लग रहा था, इसलिए मैंने उसे बाग में आराम करने भेजा है।” राजा तुरंत बाग में पहुँचे। वहाँ उन्होंने राजवीर को कमजोर और थका देखा। उन्होंने सेवकों से पूछा, “क्या बात है?” सेवकों ने डरते हुए कुछ नहीं बताया। राजा ने राजवीर की हालत देखी और उसकी आँखों में आँसू भर आए। कुछ ही दिनों में राजवीर की मृत्यु हो गई। राजा दुखी हुए, लेकिन रानी के चेहरे पर हल्की सी संतुष्टि थी। उसने सोचा, अब राजा फिर से सिर्फ उसी पर ध्यान देगा। राज्य में एक साधु आया, जिसने यह सब देखा। उसने राजा से कहा, “महाराज, हाथी की मौत मात्र एक जीवन की घटना नहीं है। इसका कारण गहरे हैं।” राजा ने विनम्रता से पूछा, “गुरुदेव, इसका क्या रहस्य है?” साधु बोले, “रानी चंद्रप्रभा की ईर्ष्या ने इस बार हाथी का जीवन समाप्त किया है। लेकिन, यही संबंध इनके पूर्वजन्म में भी था।” राजा और दरबार हैरान हो गए। साधु ने आगे कहा, “पूर्व जन्म में चंद्रप्रभा एक दूसरी रानी थी और राजवीर एक सुंदर युवती। उस रानी ने भी ईर्ष्या के कारण उस युवती को पीड़ा दी थी। समय के चक्र में roles बदल गए, लेकिन कर्म वही रहे। अब रानी की ईर्ष्या ने राजवीर का जीवन फिर से छीन लिया।” रानी चंद्रप्रभा गहरे सोच में पड़ गई। उसने साधु से पूछा, “क्या मेरे पाप का प्रायश्चित हो सकता है?” साधु बोले, “पश्चाताप और दया से जीवन बदल सकता है। अपने कर्म सुधारो, और प्राणी मात्र के प्रति दया रखो।” रानी ने हाथी की मृत्यु पर सच्चे मन से दुख व्यक्त किया। उसने अपने कर्मों का पश्चाताप किया और राज्य में सभी जानवरों और सेवकों के प्रति दया और स्नेह का व्यवहार किया। समय के साथ, रानी की छवि बदल गई। अब लोग उसे उसकी उदारता और करुणा के लिए जानते थे। साधु ने राजा से कहा, “महाराज, यही है कर्म का चक्र। हर जीवन में हमारे कर्म हमारे साथ चलते हैं। ईर्ष्या या अन्य बुराइयों को त्याग दो, तभी सच्ची शांति मिलेगी।” रानी की कहानी राज्य में बच्चों को सुनाई जाने लगी—ईर्ष्या की आग किसी का भला नहीं करती, बल्कि अपने ही जीवन को दुख से भर देती है। रानी चंद्रप्रभा ने अपने अनुभव से सीखा कि जीवन में प्रेम, दया और क्षमा ही सबसे बड़ा धन है, और यही संदेश उसने आने वाली पीढ़ियों को दिया।