चालाक कौआ और घड़े की सीख
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चालाक कौआ और घड़े की सीख

यह प्रसिद्ध पंचतंत्र की कहानी एक प्यासे कौए की बुद्धिमानी को दर्शाती है, जिसमें उसने कंकड़ों की मदद से घड़े का पानी बढ़ाया और अपनी प्यास बुझाई. यह कहा...

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by Storiyaa Editorial
पंचतंत्र की कहानियाँ

Episode 13 of a series

पंचतंत्र की कहानियाँ

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एक बार की बात है, गर्मी का मौसम था. आसमान से सूरज आग बरसा रहा था और धरती तप रही थी. ऐसे ही एक दिन, एक कौआ बहुत दूर तक उड़ता-उड़ता थक गया. सूरज की तेज़ किरणों और सूखे वातावरण की वजह से उसे बहुत तेज़ प्यास लगी. वह अपने गले में सूखापन महसूस कर रहा था और उसकी तलाश थी, एक घूँट ठंडे पानी की. कौआ ने इधर-उधर देखा, आसमान से पेड़ों के झुरमुटों के पास, खेतों की मेंड़ों के ऊपर, लेकिन कहीं भी उसे पानी का नामोनिशान नहीं दिखा. उसकी प्यास बढ़ती जा रही थी और वह बेचैनी से कभी इधर तो कभी उधर उड़ता रहा. अचानक, उसकी नजर एक बगीचे के कोने में रखे एक पुराने घड़े पर पड़ी. कौआ तुरंत तेज़ी से नीचे उतरा और घड़े के पास जा पहुँचा. उसने उत्सुकता से झुककर घड़े में झाँका. लेकिन यह क्या! घड़े में पानी तो था, पर बहुत कम. पानी की सतह इतनी नीचे थी कि उसकी चोंच वहाँ तक नहीं पहुँच पा रही थी. कौआ को थोड़ी निराशा हुई. कौआ ने सोचा, "अगर मैं अपनी चोंच भीतर नहीं डाल सकता, तो अब क्या करूँ? इतनी प्यास लगी है, लेकिन पानी मिलकर भी पी नहीं पा रहा." कौआ थककर घड़े के पास बैठ गया. वह सोचने लगा, "क्या यह मेरी कहानी का अंत है? क्या मुझे यहाँ हार मान लेनी चाहिए?" लेकिन कौआ हार मानने वालों में से नहीं था. उसने अपने दिमाग को दौड़ाया और समाधान खोजने की कोशिश की. तभी उसकी नजर घड़े के पास बिखरे छोटे-छोटे कंकड़ों पर पड़ी. उसके मन में एक विचार कौंध गया. उसने अपने आप से कहा, "अगर मैं इन कंकड़ों को एक-एक कर घड़े में डालूँ, तो शायद पानी ऊपर आ जाएगा!" अब कौआ फुर्ती से काम पर लग गया. वह चोंच में एक-एक कंकड़ उठाता और घड़े में डालता. हर बार जब वह कंकड़ डालता, तो पानी की सतह थोड़ी-थोड़ी ऊपर उठती जाती. कौआ को उम्मीद की किरण नज़र आने लगी. वह बिना थके, लगातार कंकड़ डालता रहा. कुछ ही देर में घड़े का पानी इतनी ऊपर आ गया कि कौआ की चोंच आराम से उस तक पहुँच सके. कौआ ने खुशी-खुशी घड़े में अपनी चोंच डाली और ठंडा पानी पीने लगा. उसकी प्यास बुझ गई. कौआ ने राहत की सांस ली और आसमान की ओर देखकर गर्व से बोला, "जहाँ चाह है, वहाँ राह है!" कौआ ने समझ लिया कि मुश्किल हालात में भी अगर हम हार न मानें और अपनी बुद्धि का इस्तेमाल करें, तो रास्ता खुद-ब-खुद निकल आता है. उस दिन के बाद कौआ अपने दोस्तों को भी यह कहानी सुनाता रहा. वह कहता, "कभी भी मुश्किल से घबराओ मत. हमेशा सोचो, समाधान जरूर मिलेगा. समस्या का सामना हिम्मत और चतुराई से करना चाहिए." इस कहानी को सुनकर सभी जानवर भी मुस्कराते और कौए की बुद्धिमानी की तारीफ करते. मोर ने कहा, "कौए भाई, तुमने तो हमें सिखा दिया कि बुद्धि सबसे बड़ी ताकत है." गिलहरी बोली, "अब मैं भी किसी मुश्किल में पड़ूँगी, तो पहले दिमाग लगाऊँगी!" इस तरह, कौए ने सभी को यह अमूल्य सीख दी कि संकट के समय घबराना नहीं चाहिए, बल्कि सोच-समझकर रास्ता निकालना चाहिए. कहानी का सार यही है: समस्या कितनी भी बड़ी क्यों न हो, अगर हम धैर्य और समझदारी से काम लें, तो हर कठिनाई का हल मिल सकता है. इसलिए कहते हैं - "समस्याओं का समाधान बुद्धि और धैर्य से ही निकलता है."

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