चालाक गीदड़ और भूखा बाघ: लोककथा की सीख
Folklore

चालाक गीदड़ और भूखा बाघ: लोककथा की सीख

एक यात्री ने जाल में फंसे बाघ को बचाया, लेकिन बाघ ने उसे खाने की धमकी दी। तभी एक गीदड़ ने अपनी चालाकी से यात्री की जान बचाई।

by Storiyaa Editorial
पंचतंत्र की कहानियाँ

Episode 14 of 25

पंचतंत्र की कहानियाँ

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चालाक सियार और भोला हिरन: पंचतंत्र की सीख

  1. बातूनी कछुआ - एक जानलेवा चुप्पी

    Ep 14:0764 plays

  2. नेवले का बलिदान - पंचतंत्र की कहानी

    Ep 25:5814 plays

  3. बंदर और मगरमच्छ

    Ep 31:2713 plays3 ✦

  4. नीला सियार

    Ep 42:085 plays3 ✦

  5. चालाक बगुला और समझदार केकड़ा

    Ep 54:0060 plays3 ✦

  6. पंचतंत्र की मित्रता: चूहों और हाथियों की कथा

    Ep 63:315 plays3 ✦

  7. चालाक खरगोश और शेर का अक्स

    Ep 74:057 plays3 ✦

  8. कौए और सियार की चालाकी: पंचतंत्र की कहानी

    Ep 83:215 plays3 ✦

  9. सांप, नेवला और अधीर माँ: पंचतंत्र की सीख

    Ep 93:393 plays3 ✦

  10. शेर और चूहे की दोस्ती: ईसप की सीख

    Ep 103:171 play3 ✦

  11. लोमड़ी और खट्टी अंगूर की कहानी (ईसप की कथा)

    Ep 113:353 ✦

  12. सच्ची मित्रता और भालू की सीख

    Ep 123:0016 plays3 ✦

  13. चालाक कौआ और घड़े की सीख

    Ep 133:423 ✦

  14. चालाक गीदड़ और भूखा बाघ: लोककथा की सीख

    Ep 143:233 ✦

  15. चालाक सियार और भोला हिरन: पंचतंत्र की सीख

    Ep 153:543 ✦

  16. ब्राह्मण, बकरी और तीन चालाक चोरों की कहानी

    Ep 163:203 plays3 ✦

  17. बंदर की नकलची आदत और दुखद सजा

    Ep 173:543 ✦

  18. शेर, ऊँट और चालाक सियार की कहानी

    Ep 183:413 ✦

  19. शेर की खाल में गधा: पंचतंत्र की सीख

    Ep 192:553 ✦

  20. धर्म की परीक्षा: राजकुमार की अनोखी परीक्षा

    Ep 203:453 plays3 ✦

  21. बलिदानी बंदर राजाः एक प्रेरणादायक जातक कथा

    Ep 213:543 ✦

  22. खरगोश का त्याग: एक प्रेरणादायक कहानी

    Ep 223:573 ✦

  23. ईर्ष्या की आग: रानी, हाथी और पूर्व जन्म की कथा

    Ep 234:093 ✦

  24. सुनहरे हिरण राजा की करुणा और बलिदान

    Ep 244:053 ✦

  25. हँसी का इलाज: राजा और वैद्य की कहानी

    Ep 254:153 ✦

About This Story

Story Transcript

एक घना जंगल था जहाँ तरह-तरह के जानवर अपनी-अपनी जिंदगी में मस्त रहते थे। एक दिन, उस जंगल से एक नेकदिल यात्री गुजर रहा था। वह लंबा सफर तय कर चुका था, सूरज सिर पर था और हवा भी गर्म थी। यात्री पेड़ों की छांव में थोड़ा सुस्ताने बैठ गया। तभी उसे पास से किसी के कराहने की आवाज़ आई। “कोई है? मेरी मदद करो!” आवाज़ दुख भरी थी। यात्री आवाज़ की दिशा में गया तो देखा, एक बड़ा बाघ लोहे के पिंजरे में फंसा हुआ था। बाघ ने ज़ोर से कहा, “मुझे इस जाल से निकाल दो, मैं बहुत दिनों से भूखा हूँ, मुझे दया आ रही है।” यात्री को बाघ पर दया आ गई। उसने पिंजरे का ताला खोल दिया। बाघ बाहर आते ही डरावनी आवाज़ में बोला, “अब मैं तुम्हें खाऊँगा, क्योंकि मैं भूख से मर रहा हूँ!” यात्री घबरा गया, “यह तो अन्याय है! मैंने तुम्हारी जान बचाई, अब तुम मुझे ही खा जाओगे?” बाघ बोला, “जंगल का नियम यही है। पर देखो, अगर कोई तीसरा निष्पक्ष फैसला कर दे कि मुझे क्या करना चाहिए, तो मैं मान लूँगा।” यात्री ने राहत की सांस ली। दोनों साथ-साथ जंगल में निकले और रास्ते में एक विशाल बरगद के पेड़ के पास पहुँचे। यात्री ने पेड़ से पूछा, “बरगद बाबा, क्या यह न्याय है कि मैंने बाघ की मदद की और अब यह मुझे खाने जा रहा है?” बरगद ने धीमे स्वर में कहा, “बेटा, मैंने भी उम्रभर लोगों को छाया दी, हवा दी, लेकिन जब बूढ़ा हो गया, लोगों ने मेरी डालियाँ काट दीं। दुनिया में भलाई का यही फल मिलता है।” यात्री निराश हो गया। आगे बढ़ते हुए उन्हें सड़क पर एक बूढ़ा बैल मिला। यात्री ने उसकी भी सलाह ली। बैल ने कहा, “मैंने जीवनभर खेत जोते, लोगों का बोझ उठाया, लेकिन बूढ़ा होने पर मुझे छोड़ दिया गया। भलाई का यही अंत है।” यात्री की उम्मीद टूटने लगी। तभी दूर से एक चालाक गीदड़ आता दिखाई दिया। गीदड़ ने दोनों को उदास देखा, तो पूछा, “भाइयों, क्या हुआ? क्यों इतने परेशान हो?” यात्री ने पूरी बात बताई। गीदड़ ने सिर हिलाते हुए कहा, “इस कहानी में जरूर कोई गड़बड़ है। मुझे ठीक से समझाओ, बाघ पिंजरे में कैसे फंसा था?” बाघ ने गीदड़ को समझाने के लिए वापस पिंजरे में जाकर दिखाया, “मैं ऐसे फंसा था।” गीदड़ ने सिर खुजलाया, “पिंजरा तो छोटा है, क्या सच में तुम इसमें पूरा आ सकते हो?” बाघ ने इधर-उधर घुसकर, दरवाजा बंद करके दिखाया, “देखो, मैं अंदर हूँ।” गीदड़ दौड़कर ताले को बंद कर देता है और मुस्कराकर बोला, “अब रहो अपने पिंजरे में! भलाई का बदला बुराई से नहीं, समझदारी से देना चाहिए।” यात्री की जान बच गई। वह गीदड़ को धन्यवाद कहता है, “तुमने आज मुझे जीवन का बड़ा पाठ पढ़ाया।” गीदड़ मुस्कराया, “याद रखो, कभी भी एहसान फरामोश की मदद मत करो और मुश्किल वक्त में बुद्धि का इस्तेमाल करो।” यात्री ने गीदड़ को सलाम किया और अपनी यात्रा पर निकल गया, लेकिन अब उसके चेहरे पर मुस्कान थी और मन में यह सीख बैठ गई थी कि भलाई सोच-समझकर करनी चाहिए। इस कहानी से यही सीख मिलती है कि भलाई सोच-समझकर करें और संकट के समय बुद्धि का उपयोग करें।