बलिदानी बंदर राजाः एक प्रेरणादायक जातक कथा
Folklore

बलिदानी बंदर राजाः एक प्रेरणादायक जातक कथा

जब एक लालची राजा ने बंदरों के झुंड पर संकट ला दिया, तब उनके नायक बंदर राजा ने अद्भुत नेतृत्व और बलिदान से सबको बचाया. जानिए वीरता और निस्वार्थ सेवा की...

by Storiyaa Editorial
पंचतंत्र की कहानियाँ

Episode 21 of 25

पंचतंत्र की कहानियाँ

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खरगोश का त्याग: एक प्रेरणादायक कहानी

  1. बातूनी कछुआ - एक जानलेवा चुप्पी

    Ep 14:0764 plays

  2. नेवले का बलिदान - पंचतंत्र की कहानी

    Ep 25:5814 plays

  3. बंदर और मगरमच्छ

    Ep 31:2713 plays3 ✦

  4. नीला सियार

    Ep 42:085 plays3 ✦

  5. चालाक बगुला और समझदार केकड़ा

    Ep 54:0060 plays3 ✦

  6. पंचतंत्र की मित्रता: चूहों और हाथियों की कथा

    Ep 63:315 plays3 ✦

  7. चालाक खरगोश और शेर का अक्स

    Ep 74:057 plays3 ✦

  8. कौए और सियार की चालाकी: पंचतंत्र की कहानी

    Ep 83:215 plays3 ✦

  9. सांप, नेवला और अधीर माँ: पंचतंत्र की सीख

    Ep 93:393 plays3 ✦

  10. शेर और चूहे की दोस्ती: ईसप की सीख

    Ep 103:171 play3 ✦

  11. लोमड़ी और खट्टी अंगूर की कहानी (ईसप की कथा)

    Ep 113:353 ✦

  12. सच्ची मित्रता और भालू की सीख

    Ep 123:0016 plays3 ✦

  13. चालाक कौआ और घड़े की सीख

    Ep 133:423 ✦

  14. चालाक गीदड़ और भूखा बाघ: लोककथा की सीख

    Ep 143:233 ✦

  15. चालाक सियार और भोला हिरन: पंचतंत्र की सीख

    Ep 153:543 ✦

  16. ब्राह्मण, बकरी और तीन चालाक चोरों की कहानी

    Ep 163:203 plays3 ✦

  17. बंदर की नकलची आदत और दुखद सजा

    Ep 173:543 ✦

  18. शेर, ऊँट और चालाक सियार की कहानी

    Ep 183:413 ✦

  19. शेर की खाल में गधा: पंचतंत्र की सीख

    Ep 192:553 ✦

  20. धर्म की परीक्षा: राजकुमार की अनोखी परीक्षा

    Ep 203:453 plays3 ✦

  21. बलिदानी बंदर राजाः एक प्रेरणादायक जातक कथा

    Ep 213:543 ✦

  22. खरगोश का त्याग: एक प्रेरणादायक कहानी

    Ep 223:573 ✦

  23. ईर्ष्या की आग: रानी, हाथी और पूर्व जन्म की कथा

    Ep 234:093 ✦

  24. सुनहरे हिरण राजा की करुणा और बलिदान

    Ep 244:053 ✦

  25. हँसी का इलाज: राजा और वैद्य की कहानी

    Ep 254:153 ✦

About This Story

Story Transcript

बहुत समय पहले, हिमालय की तलहटी में आम के पेड़ों से घिरा एक सुंदर जंगल था। इस जंगल में सैकड़ों बंदर रहते थे। इन बंदरों का राजा बड़ा ही बुद्धिमान, निडर और दयालु था। सारे बंदर उसका बहुत आदर करते थे, क्योंकि वह सदा सबकी भलाई सोचता था। एक बार, वसंत के मौसम में जंगल के आम के पेड़ पर बहुत बड़े-बड़े मीठे आम लगे। बंदरों का झुंड रोज़ वहां आकर आम का रस लेते और खूब आनंद से खाते। पर बंदर राजा ने सबको समझाया था, "बच्चो, अपने खाने के बाद हमेशा कुछ आम नीचे मत गिरने देना। अगर कोई इंसान इन्हें देख लेगा, तो हमारी मुसीबत आ जाएगी।" सब बंदर राजा की बात मानते, लेकिन एक दिन एक छोटा बंदर आम खाने में इतना मग्न हो गया कि एक पका आम उसकी पकड़ से छूटकर पास के नदी में गिर पड़ा। नदी का बहाव उस आम को दूर ले गया। उसी नदी के किनारे, उस राज्य के राजा ने अपना शिविर लगाया था। राजा सुबह-सुबह नदी का जल लेने आए तो उन्हें एक पका आम बहता हुआ दिखा। राजा ने ऐसा मीठा और बड़ा आम कभी नहीं देखा था। उसने आम चखा और उसका स्वाद उसे जन्नत जैसा लगा। राजा ने अपने सिपाहियों से कहा, "जंगल में चलो, मुझे ऐसे और आम चाहिए।" राजा की सेना गहरी जंगल में पहुंचकर आम के पेड़ तक पहुंची। सैकड़ों बंदर पेड़ पर बैठे आम खा रहे थे। राजा ने सिपाहियों को आदेश दिया, "सारे आम लाओ और इन बंदरों को पकड़ो। मेरे राज्य में केवल मैं इन आमों का स्वाद लूँगा!" बंदरों में हड़कंप मच गया। राजा और उसकी सेना ने धनुष-बाण संभाल लिए। बंदर इधर-उधर भागने लगे, पर पेड़ के नीचे सैनिकों ने घेरा डाल लिया। बंदर राजा ने देखा कि उसके सारे साथी फँस गए हैं। उसने तुरंत उपाय सोचा। आम का पेड़ नदी के किनारे था, और दूसरी तरफ़ एक लंबा बांस का झाड़ था। अगर किसी तरह बाकी बंदरों को झाड़ तक पहुंचा दिया जाये, तो सबकी जान बच सकती है। बंदर राजा ने अपनी लंबी पूंछ और मजबूत शरीर के बल पर आम के पेड़ से छलांग लगाकर झाड़ियों तक की दूरी नापी। वह दोनों पेड़ों के बीच खुद को पुल की तरह झुका कर लेट गया। उसने अपने साथियों को पुकारा, "जल्दी करो, मेरी पीठ से चलकर दूसरी तरफ़ चले जाओ!" एक-एक कर सारे बंदर राजा की पीठ पर चढ़कर झाड़ियों तक पहुँच गए। बंदर राजा के शरीर पर पैरों के निशान और खरोंच आ गए, मगर उसने हिम्मत नहीं हारी। आखिर में सबसे छोटा बच्चा भी बच गया। इतने में राजा और उसके सैनिक यह अद्भुत नज़ारा देख रहे थे। वे हैरान थे — इतना साहस और त्याग किसी ने नहीं देखा था। जब सब बंदर बच गए, तो बंदर राजा भी गिर पड़ा। उसके शरीर में अब जान नहीं रही थी, क्योंकि वह पूरी तरह थक चुका था। मनुष्य राजा उसके पास आया, उसकी आँखों में आँसू थे। वह बोला, "हे वीर, तुम अपनी प्रजा के लिए अपनी जान दे बैठे। मैं तुम्हारे इस त्याग को सदा याद रखूँगा।" मनुष्य राजा ने बंदर राजा का पूरे सम्मान के साथ अंतिम संस्कार करवाया और वचन दिया कि वह कभी लालच में आकर निर्दोष जीवों का अहित नहीं करेगा। उस दिन के बाद, राजा का हृदय बदल गया। उसने जंगल की रक्षा और सभी जीवों की भलाई का काम शुरू किया। बंदरों के झुंड ने अपने महान राजा को कभी नहीं भुलाया। जंगल में जब भी हवा चलती, पत्तों की सरसराहट में सबको अपने राजा की वीरता और निस्वार्थ प्रेम की याद आ जाती थी। इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि सच्चा नेता वही है, जो अपने लोगों के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दे। निस्वार्थ सेवा और बलिदान के बिना सच्चा नेतृत्व सम्भव नहीं।