▶Story Transcript
बहुत समय पहले की बात है, एक घने जंगल के किनारे तीन छोटे-छोटे भाई रहते थे। सबसे बड़ा भाई था वीर, बीच वाला था समीर, और सबसे छोटा भाई था अमन। तीनों भाई बहुत अच्छे दोस्त थे और हमेशा एक-दूसरे की मदद करते थे।
एक दिन, उनकी माँ ने उनसे कहा, “अब तुम लोग बड़े हो गए हो। तुम्हें अपनी-अपनी झोपड़ी बनानी चाहिए, ताकि जंगल के खतरे से सुरक्षित रहो।” तीनों भाइयों ने उत्साह से सिर हिलाया और अपनी-अपनी झोपड़ी बनाने निकल पड़े।
वीर सबसे पहले निकला। वह बहुत जल्दी में था। उसे खेलना पसंद था और उसे लगता था कि झोपड़ी बनाना बहुत आसान है। उसने सूखे घास और पत्तों का ढेर इकट्ठा किया और जल्दी-जल्दी एक छोटी सी झोपड़ी बना ली। वह मुस्कुराया, “देखो, मेरा घर बन गया! अब मैं आराम से खेल सकता हूँ।”
समीर ने वीर को देखा और सोचा, “मुझे अपना घर थोड़ा मजबूत बनाना चाहिए।” उसने पास के छड़ों और पतली टहनियों को इकट्ठा किया और थोड़ा ज्यादा समय लिया। उसकी झोपड़ी वीर की तुलना में मजबूत थी, लेकिन पूरी तरह सुरक्षित नहीं थी। समीर खुश था, “मेरा घर वीर से अच्छा है!”
अमन सबसे छोटा था, पर सबसे समझदार भी। उसने सोचा, “शक्तिशाली भेड़िया कभी भी आ सकता है। मुझे ऐसा घर बनाना है जो उसकी फूँक से भी न गिरे।” उसने जंगल से मजबूत लकड़ियाँ ढूँढीं, बड़े-बड़े पत्थर जमा किए और बहुत मेहनत से अपनी झोपड़ी बनाई। उसे पूरा दिन लग गया, लेकिन उसका घर बहुत ठोस और मजबूत बना।
तीनों भाई अपने-अपने घरों में जाकर सो गए। लेकिन जंगल में एक चालाक और भूखा भेड़िया घूम रहा था। वह तीनों भाइयों की खुशबू को सूँघते हुए आया और सबसे पहले वीर के घर पहुँचा।
भेड़िये ने ज़ोर से दरवाजे पर दस्तक दी, “अरे छोटे, मुझे अंदर आने दो!”
वीर डर गया, पर बोला, “नहीं, मैं तुम्हें अंदर नहीं आने दूँगा!”
भेड़िया हँसा, “तो मैं तेरे घर को फूँक मारकर गिरा दूँगा!” और उसने ज़ोर से फूँक मारी। वीर का घास का घर उड़ गया और वीर डरकर समीर के घर भाग गया।
भेड़िया अब समीर के घर पहुँचा। उसने फिर से दरवाजे पर दस्तक दी, “मुझे अंदर आने दो!”
दोनों भाइयों ने दरवाजा बंद कर लिया। भेड़िया बोला, “अगर नहीं खोला, तो मैं फूँक मारकर तुम्हारा घर गिरा दूँगा!” उसने फूँक मारी, और समीर का टहनियों का घर भी जमीन पर गिर पड़ा। दोनों भाई चिल्लाते हुए अमन के घर की ओर भागे।
अब तीनों भाई अमन के मजबूत घर में इकट्ठा हो गए। भेड़िया वहाँ पहुँचा और गरज कर बोला, “मुझे अंदर आने दो!”
अमन ने अपने भाइयों का हाथ थाम लिया और बोला, “चिंता मत करो, मेरा घर मजबूत है।”
भेड़िया बोला, “अगर नहीं खोला, तो मैं फूँक मारूंगा!” उसने जितनी जोर से संभव था, फूँक मारी, लेकिन अमन का घर नहीं हिला। उसने फिर कई बार कोशिश की, पर हर बार उसे नाकामी मिली।
थककर, भेड़िया छत से अंदर आने की तरकीब सोचने लगा। लेकिन अमन समझदार था। उसने चूल्हे पर बड़ा सा पानी उबालने के लिए रख दिया। जैसे ही भेड़िया छत से कूदकर अंदर आया, वह गर्म पानी में गिर पड़ा और चिल्लाता हुआ बाहर भाग गया। भेड़िया इतना डर गया कि जंगल में कहीं दूर भाग गया और फिर कभी उन भाइयों के पास नहीं आया।
तीनों भाई खुश हो गए। वीर और समीर ने अमन को गले लगाया। वीर बोला, “अब मुझे समझ आया कि मेहनत और धैर्य से ही सच्ची सुरक्षा मिलती है।”
समीर ने भी सिर हिलाया, “अब से मैं भी हर काम पूरा मन लगाकर करूंगा।”
अमन मुस्कुराया, “हमेशा समझदारी और मेहनत से काम करना चाहिए। तभी हम किसी भी मुश्किल का सामना कर सकते हैं।”
उस रात तीनों भाई अमन के मजबूत घर में चैन की नींद सोए। बाहर तारे टिमटिमा रहे थे, और दूर-दूर तक हर तरफ शांति थी।