▶कहानी ट्रांसक्रिप्ट
बहुत समय पहले, एक घना जंगल था जिसमें सभी जानवर मिल-जुल कर रहते थे। लेकिन जंगल का राजा, शेर, बहुत ही क्रूर और भूखा था। वह हर दिन कई जानवरों का शिकार करता, जिससे जंगल के जानवर डरे-सहमे रहते थे। धीरे-धीरे जंगल में जानवरों की संख्या कम होने लगी।
एक दिन सभी जानवर इकट्ठा हुए और उन्होंने शेर के पास जाकर विनती की, “हे जंगल के राजा, यदि आप इसी तरह शिकार करते रहे तो जल्द ही जंगल में कोई जानवर नहीं बचेगा। हम एक समझौता करना चाहते हैं। हर दिन हम बारी-बारी से एक जानवर खुद आपके पास भेज देंगे और आप बाकी को छोड़ देंगे।”
शेर को यह बात पसंद आ गई। अब हर दिन एक जानवर शेर के लिए चुना जाता और वह डर के मारे उसके पास जाता। एक दिन, बारी आई खरगोश की। खरगोश छोटा था, लेकिन बहुत ही चतुर। वह जाने से पहले सोचने लगा, “अगर मैं सीधे शेर के पास गया, तो मुझे भी मरना ही है। क्यों न कोई रास्ता निकाला जाए जिससे मैं अपनी जान भी बचा सकूं और बाकी जानवरों की भी रक्षा हो सके।”
खरगोश धीरे-धीरे शेर के पास चल पड़ा। वह जानबूझकर देर करता गया। शेर भूख से तिलमिलाता रहा। जब खरगोश बहुत देर से पहुंचा तो शेर गुस्से से दहाड़ पड़ा, “इतनी देर क्यों लगाई? क्या तुम्हें अपनी जान प्यारी नहीं?”
खरगोश कांपते हुए बोला, “महाराज, मैं तो समय पर ही आ रहा था, लेकिन रास्ते में एक भयानक शेर ने मुझे रोक लिया। उसने कहा कि वह भी इस जंगल का राजा है और कोई भी जानवर, जो आपके पास जाए, उसे पहले उसी से पूछना होगा। वह बहुत डरावना और ताकतवर लगता था।”
शेर की आंखों में आग सी जल उठी। उसने दहाड़ते हुए कहा, “इस जंगल का केवल एक ही राजा है, और वह मैं हूं! वह दुस्साहसी शेर कहां है? मुझे अभी उसी के पास ले चलो।”
खरगोश धीरे-धीरे शेर को जंगल के किनारे एक पुराने कुएं के पास ले गया। उसने इशारा करते हुए कहा, “महाराज, वही शेर इसी कुएं में रहता है। जब मैं आपके पास आ रहा था, उसने यहीं मुझे रोका था। अगर आप चाहें तो उससे मिल सकते हैं।”
शेर बिना सोचे-समझे कुएं के पास गया और उसमें झांका। पानी में उसे अपना ही अक्स दिखाई दिया। उसे लगा कि कुएं के अंदर एक और शेर है। शेर ने दहाड़ते हुए कुएं में देखा, तो उसका अक्स भी दहाड़ता हुआ नजर आया।
गुस्से से भरा शेर बोला, “अगर तू सच में जंगल का राजा है तो बाहर आ!” लेकिन कुएं से कोई आवाज बाहर नहीं आई, सिवाय उसकी गूंज के। शेर ने फिर दहाड़ लगाई, और उसका प्रतिबिंब भी वैसे ही दहाड़ता रहा। शेर को लगा कि कुएं के अंदर वाला शेर उसे चुनौती दे रहा है।
क्रोध में आकर शेर जोर से कुएं में कूद पड़ा, जहां उसका कोई मुकाबला नहीं था—वह सीधा गहरे पानी में जा गिरा। शेर ने बाहर निकलने की बहुत कोशिश की, लेकिन उतने गहरे कुएं से वह निकल नहीं सका। अंत में, वह थक-हारकर डूब गया।
खरगोश ने राहत की सांस ली और जल्दी से जंगल लौट गया। सारे जानवर खरगोश के चारों ओर इकट्ठा हो गए और उसकी बहादुरी की प्रशंसा करने लगे। उन्होंने खुशी-खुशी नृत्य किया और कहा, “तुम्हारी समझदारी और साहस ने हम सब की जान बचा ली।”
खरगोश मुस्कराया और बोला, “जहां बुद्धि है, वहां ताकत भी हार जाती है। हमेशा संकट में घबराना नहीं चाहिए, बल्कि ठंडे दिमाग से सामना करना चाहिए।”
उस दिन के बाद से जंगल में सुख-शांति लौट आई। जानवरों ने मिलकर तय किया कि वे हमेशा एक-दूसरे की मदद करेंगे और बुद्धिमता से ही किसी भी समस्या का हल निकालेंगे।
इस तरह, छोटे से खरगोश की चतुराई ने पूरे जंगल को बचा लिया और सभी को यह सिखाया कि समझदारी से बड़ी से बड़ी मुसीबत को भी हराया जा सकता है।