शेर की खाल में गधा: पंचतंत्र की सीख
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शेर की खाल में गधा: पंचतंत्र की सीख

यह पंचतंत्र की प्रसिद्ध कहानी एक गधे की है, जो शेर की खाल पहनकर सभी को डराता है, लेकिन आखिरकार उसकी असलियत उसके बोलने से उजागर हो जाती है।

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by Storiyaa Editorial
पंचतंत्र की कहानियाँ

Episode 19 of a series

पंचतंत्र की कहानियाँ

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बहुत समय पहले की बात है। एक छोटे से गाँव के पास एक गरीब धोबी रहता था। उसके पास एक कमजोर और भूखा-सा गधा था। वह गधा रोज़ अपने मालिक के साथ कपड़े धोने जाया करता, लेकिन उसके लिए खाना जुटाना मुश्किल हो जाता था। एक दिन धोबी जंगल के रास्ते से जा रहा था कि उसे झाड़ियों में एक शेर की खाल दिखाई दी। किसी शिकारी ने शायद शेर को मारकर उसकी खाल वहीं छोड़ दी थी। धोबी को एक शरारती विचार आया। उसने गधे से कहा, "अगर मैं तुझे यह शेर की खाल पहना दूं, तो तू बाघ जैसा लगेगा और जंगल के जानवर तुझसे डरेंगे। तू आराम से खेतों में घुसकर खाने को मिल जाएगा और कोई तुझे रोक भी नहीं सकेगा।" गधा इस विचार से बहुत खुश हुआ, क्योंकि उसे तो बस खाने से मतलब था। धोबी ने गधे को शेर की खाल पहनाई और उसे खेतों की ओर भेज दिया। गधा दूर से सच में शेर की तरह दिखता था। खेतों में चरने वाले जानवर और वहाँ के किसान उसे देखकर डरकर भाग जाते। कोई भी इतनी हिम्मत नहीं कर सका कि उसके पास जाए। गधा दिनभर ताजे हरे चारे का आनंद लेता रहा। उसके मन में डर था कि कहीं उसकी असलियत न खुल जाए, इसलिए वो हर समय चुपचाप खाता रहा। धीरे-धीरे उसकी यह चालाकी रोज़ की बात हो गई। अब वह रोज़ खेतों में जाता, पेट भरके चारा खाता और शाम होते-होते वापस धोबी के पास लौट आता। एक दिन गधा बहुत खुश था। उसे इतनी अच्छी घास कभी नहीं मिली थी। पेट भर जाने के बाद, उसकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। तभी पास के खेत में कुछ असली गधे घास चरते दिखे। वह उन्हें देखकर खुद को रोक नहीं सका और ज़ोर से, अपने असली गधे वाली आवाज़ में रेंकने लगा — "ढेंचू, ढेंचू!" उसकी आवाज़ सुनते ही आस-पास के किसान चौकन्ने हो गए। वे समझ गए कि ये सच में शेर नहीं, बल्कि गधे की आवाज़ है। सभी किसान लाठियाँ लेकर भागते हुए आए और गधे को घेर लिया। किसानों ने शेर की खाल उतारी और गधे की पोल खुल गई। उन्होंने गधे को खूब डांट लगाई और उसे भगा दिया। धोबी भी अपने गधे की इस शरारत पर बहुत शर्मिंदा हुआ। गधा चुपचाप जंगल की ओर चला गया और सोचने लगा, "काश, मैंने अपनी असली आवाज़ न निकाली होती।" इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि हम चाहे जितना भी भेष बदल लें, हमारी असलियत एक न एक दिन सामने आ ही जाती है। दिखावे से कुछ नहीं होता, सच्चाई हमेशा उजागर हो जाती है। इसलिए, हमेशा ईमानदार रहो और दिखावा करने से बचो। मूल्यवान सीख – अपनी असलियत छुपाकर दूसरों को धोखा देने की कोशिश मत करो, क्योंकि सच्चाई कभी छुपी नहीं रहती।

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