▶Transcripción
बहुत समय पहले, एक घना जंगल था। उस जंगल में एक बहुत बड़ा और पुराना बरगद का पेड़ था। उसी पेड़ की ऊँची शाखाओं पर एक कौआ और उसकी पत्नी रहते थे। दोनों बहुत मेहनती और समझदार थे और हर साल पेड़ पर अपना घोंसला बनाते थे। लेकिन उनकी एक बड़ी परेशानी थी—पेड़ के नीचे एक काला सांप रहता था।
जब भी कौआ और उसकी पत्नी अपने अंडे देते, सांप चुपचाप पेड़ पर चढ़ जाता और अंडे निगल जाता। उन दोनों के लिए यह बहुत दुख का कारण था। पत्नी कौवी अक्सर रोती, "हमारे अंडे बार-बार खा जाता है यह सांप, अब हम क्या करें?"
कौआ भी बहुत दुखी था। एक दिन उसने सोचा, "अगर ऐसे ही चलता रहा तो कभी बच्चे नहीं होंगे। कुछ करना पड़ेगा।"
अगले दिन कौआ अपने पुराने मित्र सियार के पास गया। सियार बहुत चालाक और बुद्धिमान था। कौआ बोला, "मित्र, मेरी मदद करो। सांप हमारे अंडे रोज़ खा जाता है। हम बहुत परेशान हैं।"
सियार मुस्कराया, "इस समस्या का समाधान है मेरे पास। तुम्हें मेरी हर बात ध्यान से सुननी होगी।"
कौआ बोला, "मैं तैयार हूँ, बस सांप से छुटकारा दिला दो।"
सियार ने अपनी योजना बताई, "राजमहल के पास एक पहाड़ी है, वहाँ की रानी बहुत सुंदर हार पहनती है और दोपहर में अपने दासियों के साथ नहाने जाती है। तुम दोनों उस समय उनके हार को उठा लेना। फिर हार को सांप के बिल के पास गिरा देना। बाकी काम रानियों के प्रहरी कर देंगे।"
कौआ और कौवी ने वैसा ही किया। अगले दिन, रानी अपनी दासियों के साथ नदी किनारे नहाने आई। उसने अपना बहुमूल्य हार किनारे रख दिया। कौआ और कौवी आसमान में चक्कर लगाने लगे। जैसे ही सबकी नज़रें दूसरी ओर हुईं, कौवी ने झपट कर हार उठा लिया।
हार की चमक देखकर दासियाँ चिल्लाईं, "देखो! कौआ रानी का हार ले गया!"
कौआ और कौवी उड़ते हुए सीधे बरगद के पेड़ की ओर गए और हार को सांप के बिल के पास गिरा दिया।
रानियों के प्रहरी और दासियाँ हार के पीछे भागे। सभी ने हार को सांप के बिल के पास देखा। जब वे पास आये, तो सांप फुफकारता हुआ बाहर निकला। प्रहरी डर गए, लेकिन हार कीमती था, इसलिए उन्होंने लाठियों से सांप को मार गिराया और हार निकाल लाए।
अब सांप मर चुका था। कौआ और कौवी ने राहत की सांस ली। उन्होंने फिर से अंडे दिए, और इस बार उनके प्यारे बच्चे भी निकले। वे बड़े हुए और सारे जंगल में कौओं के गीत गूंजने लगे।
कौआ ने सियार से कहा, "मित्र, तुम्हारी बुद्धिमानी ने हमें नया जीवन दिया। हम हमेशा आभारी रहेंगे।"
सियार ने मुस्कुराकर कहा, "समस्या चाहे जितनी बड़ी हो, अगर हम मिलकर समझदारी और धैर्य से काम लें, तो उसका हल निकाल सकते हैं।"
इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि बुद्धिमानी और मित्रता से बड़ी से बड़ी समस्या भी हल हो सकती है। कभी-कभी कठिनाई का सामना सीधे नहीं, चतुराई से किया जाए, तो जीत हमारी हो जाती है।