मगर देश के घने जंगलों के बीच फुल लोकपाल नाम की एक विशाल और सुंदर झील हुआ करती थी। वहां कंबू गरीब नाम का एक कछुआ रहता था। उसके दो सबसे अच्छे मित्र थे। संकट और विकेट नाम के दो शानदार वे तीनों रोज झील के किनारे बैठने और दुनिया भर की कहानी एक दूसरे को सुनते कंबू ग्राफ को बातें करना बहुत पसंद था। वो घंटे बिना रुके बोल सकता था लेकिन समय हमेशा एक सा नहीं रहता। एक साल बारिश बिल्कुल नहीं हुई। सूरज आसमान से आग बरसने लगा महीना बीत गए। धीरे-धीरे उसे विशाल झील का पानी सूखने लगा मछलियां मरने लगी और कमल के फूल मुरझाकर कीचड़ में मिल गए। हंसू ने चिंतित होकर कछुए से कहा मित्र यह झील अब हमारे रहने लायक नहीं रही। कुछ ही दिनों में यहां केवल सुखी मिटटी बचेगी। हमें 50 को उसे दूर एक नई झील की ओर जाना होगा। कछुए की आंखों में आंसू आ। तुम दोनों तो उड़ कर चले जाओगे, लेकिन मैं मैं तो जमीन पर रंगने वाला जीव हूं। इस सुख में बिना पानी के रेंगते हुए मैं रास्ते में ही तरफ कर मर जाऊंगा। मुझे यहां करने के लिए मत छोड़ो हंसों को अपने मित्र पर दया आ गई। उन्होंने बहुत विचार किया और अंततः एक योजना बनाई। संकट ने कहा, मित्र हम तुम्हें अपने साथ आसमान के रास्ते ले जाएंगे। हम एक मजबूत लकड़ी का डंडा लेंगे। हम दोनों अपनी चोट से उसे डंडे के दोनों किनारो को पकड़ने और तुम तुम उसे डंडे को बीच में से अपनी दांतों से कसकर पकड़ लेना। हम तुम्हें हवा में उड़कर नहीं झील तक ले जाएंगे। कछुआ खुशी से उछल पड़ा। ये तो अद्भुत विचार है। मैं आसमान में उडंगा। लेकिन विकेट ने उसे शक्ति से टोक रुको कंबोग़रीब इस योजना में तुम्हारी मौत का सामान भी छिपा है। तुम्हारी सबसे बड़ी कमजोरी तुम्हारी जुबान है। जब हम आसमान में उड़ेंगे तो तुम्हें देख कर नीचे जमीन पर लोग हैरान होंगे। वे तरह-तरह की बातें करेंगे। लेकिन याद रखना चाहे कोई कुछ भी कहे तुम्हें अपना मुंह बिल्कुल नहीं खोलना है। अगर तुमने जवाब देने के लिए अपना मुंह खोला तो? सीधे जमीन पर गिरोगे और तुम्हारे टुकड़े टुकड़े हो जाएंगे। कछुए ने कसम खाई मैं मुर्ख नहीं हूं। मैं अपनी जान बचाने के लिए एकदम गूंगा बन जाऊंगा। मैं एक शब्द नहीं बोलूंगा। अगली सुबह यात्रा शुरू हुई कछुए ने डंडे के बीच के हिस्से को अपने मजबूत जबड़े से जकड़ लिया। हंसों ने डंडे के दोनों सिरों को अपनी चोंच में दबाया और अपने विशाल पथ फड़फड़ाए धीरे-धीरे वे जमीन से ऊपर उठने लगे। 10 फीट 50 फीट 100 फीट कछुए ने नीचे देख पूरी दुनिया छोटी लग रही थी। जंगल खिलौने जैसे लग रहे थे वो बादलों के बीच से गुजर रहा था। ये एक चमत्कारी अनुभव था। उसने डंडे को और कसकर पकड़ लिया। एक बड़े नगर के ऊपर से गुजरे नीचे गलियों में खड़े कुछ लोगों की नजर आसमान पर पड़ी। उन्होंने एक अजीबोगरीब दृश्य देखा। अरे ऊपर देखो आसमान में देखो एक आदमी चिल्लाया पूरा नगर इकट्ठा हो गया। लोक तालियां पीटने लगे और जोर जोर से हंसने लगे। वह क्या अजूबा है। दो पक्षी एक कछुए को डंडे से लटका कर ले जा रहे हैं। जैसे कोई उड़ती हुई बैलगाड़ी हो एक दूसरा आदमी चिल्लाया अरे अगर ये का। ऊपर से गिर जाए तो मजा ही आ जाए। मैं इसे यहीं आग पर भून कर खाऊंगा। तीसरा बोला नहीं नहीं, मैं तो इसे अपने घर ले जाऊंगा और इसके मांस का स्वादिष्ट सूप बनाऊंगा। कछुआ ऊपर से सब सुन रहा था। लोग उसका मजाक उड़ा रहे थे। लोग उसे खाने की बातें कर रहे थे। उसका खून खौलना लगा। उसका अहंकार जाग उठा। वो भूल गया कि वो हजारों फीट की ऊंचाई पर है। वो भूल गया कि उसकी जान उसे डंडे पर टिकी है। हंसों ने उसकी आंखों में पलटा हुआ क्रोध देखा। वे समझ गए कि वो क्या करने जा रहा है लेकिन वे कुछ नहीं कर सकते थे क्योंकि उनकी जांच भी डंडे से बंधी थी। कछुए से रहा नहीं गया। उसने चिल्लाकर जवाब देने के लिए अपना मुंह खोल तुम सब मेरी रख लेकिन वाक्य पूरा ही नहीं हुआ। मुंह खोल ही डंडे पर से उसकी पकड़ छूट गई। वह हवा को चीरता हुआ नीचे और नीचे और नीचे गिरने लगा। धड़ाम कछुआ नगर के बीचों बीच पत्थरों पर गिरा और उसी क्षण उसके प्राण पाकिर उड़ गए। आसमान में उड़ते हुए हंसते अपने मूर्ख मित्र को गिरते हुए देखा। वह बहुत दुखी हुए, लेकिन वे कुछ नहीं कर सकते थे। बे खामोशी से नई झील की ओर उड़ गए। कहां गया है कि जो व्यक्ति अपनी शुभचिंतक। मित्रों की बात नहीं मानता और अपने अहंकार में बिना सोचे समझे बोलता है। उसका विनाश उसे बातूनी कछुए की तरह ही निश्चित है।