बातूनी कछुआ की कहानी — एक जानलेवा चुप्पी
एक तालाब में एक कछुआ रहता था। उसके दो मित्र थे — दो हंस। तीनों में गहरी दोस्ती थी। गर्मियों में जब तालाब सूखने लगा, तो हंसों ने कहा कि वे कछुए को अपने साथ किसी दूसरे तालाब तक ले जाएँगे। लेकिन एक शर्त थी — कछुए को रास्ते में मुँह नहीं खोलना था। वह एक लकड़ी को मुँह में दबाकर लटकेगा, और दोनों हंस उसे उड़ाकर ले जाएँगे।
उड़ान भरी। नीचे गाँव वाले देखकर हँसने लगे — "देखो, हंस कछुए को उड़ा रहे हैं!" कछुए को गुस्सा आया। उसने मुँह खोला — "तो क्या हुआ?" — और नीचे गिर पड़ा।
सीख: कुछ पल की चुप्पी जीवन बचाती है। आवेग में बोलना कभी-कभी सबसे बड़ी भूल होती है।
यह कहानी 2,500 साल बाद भी क्यों प्रासंगिक है?
बातूनी कछुआ की कहानी पंचतंत्र के प्रथम खंड "मित्रभेद" से है। आज के डिजिटल युग में यह कहानी और भी प्रासंगिक है। सोशल मीडिया पर बिना सोचे टिप्पणी करना, गुस्से में संदेश भेजना — ये सभी आधुनिक "बातूनी कछुए" हैं।
पंचतंत्र की अन्य नैतिक कहानियाँ Storiyaa पर
Storiyaa पर पंचतंत्र की कहानियाँ हिंदी ऑडियो श्रृंखला में 25 एपिसोड हैं।
- बातूनी कछुआ — एक जानलेवा चुप्पी — Episode 1, मुफ़्त
- नेवले का बलिदान — Episode 2, मुफ़्त
- बंदर और मगरमच्छ — Episode 3
- चालाक खरगोश और शेर का अक्स — Episode 7
FAQ
बातूनी कछुआ की कहानी क्या सिखाती है?
बातूनी कछुआ की कहानी यह सिखाती है कि आवेग में बोलना नुकसानदेह होता है। जब परिस्थिति में संयम की माँग हो, तब बोलने की इच्छा पर नियंत्रण रखना ज़रूरी है।
पंचतंत्र की कहानियाँ हिंदी में ऑडियो पर कहाँ सुनें?
Storiyaa पर पंचतंत्र की 25 कहानियाँ हिंदी ऑडियो श्रृंखला में हैं। storiyaa.com पर जाएँ। पहले दो एपिसोड मुफ़्त हैं।
पंचतंत्र कितनी पुरानी है?
पंचतंत्र की रचना लगभग 200 ईसा पूर्व से 300 ईस्वी के बीच हुई मानी जाती है। यह विश्व के सबसे प्राचीन और सर्वाधिक अनूदित ग्रंथों में से एक है।
